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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं, नई जगहें तय: अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला; केंद्र और दिल्ली पुलिस जवाब तलब

Thu, 15 Oct 2026 04:38 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 15 Oct 2026 04:38 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। दिल्ली पुलिस ने 11 अक्तूबर को जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए तय किया था। याचिका में कहा गया है कि दूर-दराज के स्थानों पर प्रदर्शन कराने से शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

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supreme court notice centre delhi police jantar mantar protest site row
दिल्ली पुलिस को 'सुप्रीम' नोटिस - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। 11 अक्तूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था। इसके साथ ही दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक जगहें तय की गई थीं। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अदालत इस बात की जांच करेगी कि अधिकारियों ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने की उपयोगिता और प्रभावशीलता पर विचार किया था या नहीं।
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प्रदर्शन के लिए कौन-कौन सी जगहें तय की गई हैं?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के 11 अक्तूबर के आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर तीन दूसरी जगहों को निर्धारित किया गया। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। अधिवक्ता स्वाति सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित करने वाली अधिसूचना बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को हटाने के फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला दिया गया है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हालिया फैसले का आधार सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें फैसले के कारण दर्ज हैं।
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प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर को जरूरी क्यों?
वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने अदालत में दलील दी कि प्रदर्शन स्थल ऐसा होना चाहिए, जहां लोग प्रभावी तरीके से अपनी बात रख सकें। याचिका में कहा गया कि प्रदर्शन को दूर-दराज के इलाकों में ले जाने से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ किसी निर्धारित जगह पर इकट्ठा होने तक सीमित नहीं है। इसमें अपनी शिकायतें सामने रखने, असहमति जताने और संबंधित अधिकारियों के साथ समाज का ध्यान जरूरी मुद्दों की ओर खींचने का अधिकार भी शामिल है।
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  • सरकारी संस्थानों के करीब होना जरूरी: याचिका में कहा गया कि प्रदर्शन स्थल संबंधित संस्थानों के नजदीक होना चाहिए, ताकि लोगों की शिकायतें उन तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।
  • आम लोगों की पहुंच अहम: प्रदर्शन स्थल तक लोगों की पहुंच और वहां होने वाले प्रदर्शन की दृश्यता उसकी प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करती है।
  • सिर्फ दूसरी जगह तय करना काफी नहीं: याचिका के मुताबिक, जंतर-मंतर को हटाकर वैकल्पिक स्थल घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, खासकर जब वहां पहुंचने और प्रदर्शन करने की विस्तृत व्यवस्था बाद में तय होनी हो।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस मुद्दे को तकनीकी विकास के संदर्भ में भी देखने की जरूरत है। जंतर-मंतर को सरकारी संस्थानों के नजदीक होने के कारण बनाए रखने की दलील पर अदालत ने संकेत दिया कि वह सरकार से उठाई गई चिंताओं पर जवाब मांगेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को पिछले दो सप्ताह के दौरान अलग-अलग तारीखों पर जारी उन निषेधाज्ञा आदेशों को पेश करने का निर्देश दिया, जिनके तहत दिल्ली में सार्वजनिक जमावड़े और प्रदर्शनों पर रोक लगाई गई थी। ये आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत जारी हुए थे, जिसे पहले दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 कहा जाता था। अदालत ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रदर्शनों से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया।

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