Supreme Court: छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने की दी इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका की स्वीकार्यता को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है। यह याचिका उनके भतीजे और बीजेपी सांसद विजय बघेल ने दायर की थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि अगर ऐसी अर्जी दाखिल की जाती है तो हाईकोर्ट को चाहिए कि वह दूसरी पक्ष को सुनने के बाद ही मामले की मेरिट पर आगे बढ़े। सुनवाई के दौरान बघेल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और सुमीर सोढ़ी ने कहा कि ‘मौन अवधि’ के उल्लंघन को भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता, इसलिए मामला स्वीकार योग्य नहीं है। बीजेपी सांसद विजय बघेल ने आरोप लगाया था कि भूपेश बघेल ने 5 बजे के बाद पाटन विधानसभा क्षेत्र में रैली निकालकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन किया। उन्होंने चुनाव को अमान्य करने और पूर्व मुख्यमंत्री को छह साल तक चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भूपेश बघेल हाईकोर्ट में जाकर इस याचिका की वैधता को चुनौती दे सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार के पूर्व विधायक अवनीश कुमार सिंह की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने सरकारी बंगले में ओवरस्टे के लिए 20.98 लाख रुपये के पेनल रेंट को चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की, 'सरकारी आवास को अनंतकाल तक नहीं रोका जा सकता।' पूर्व विधायक ने दावा किया था कि उन्हें विधायक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण ब्यूरो में नामित किया गया था और उन्हें 2008 की अधिसूचना के तहत पूर्व विधायक जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं। हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट किया था कि अधिसूचना उन्हें पहले से आवंटित मंत्री आवास में रहने की अनुमति नहीं देती। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कानून के अनुसार अन्य विकल्प अपनाने की छूट दी, लेकिन याचिका को अंततः वापस ले लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र ध्वज तिरगें से मिलते-जुलते झंडों का चुनाव चिह्नों के साथ कथित तौर पर इस्तेमाल करने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध करने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने संजय भीमशंकर थोबडे नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जो व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए थे। याचिका में कहा गया था कि कुछ राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान में तिरंगे से मिलते-जुलते झंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनमें अकसर अशोक चक्र की जगह पार्टी के चिह्न का उपयोग कर रहे हैं। याचिका में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदंचद्र पवार) और अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि यह राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का उल्लंघन है। पीठ ने कहा, वे ऐसा कब से कर रहे हैं? कुछ दल आजादी के बाद से ऐसा कर रहे हैं। न्यायालय ने इसके साथ ही याचिका खारिज कर दी।
राहुल के भाषण से जुड़ी पोस्ट पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तारी से संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषण से जुड़ी पोस्ट मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रौशन सिन्हा को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने पिछले बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान राहत बढ़ा दी।सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई थी। इसमें तेलंगाना हाईकोर्ट के 3 अप्रैल, 2025 के फैसले को चुनौती दी गई थी। तेलंगाना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, उसे जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी से कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की थी। गिरफ्तारी के डर से, सिन्हा ने उस आदेश का पालन नहीं किया।
राहुल के इस बयान से जुड़ा है मामला
यह मामला राहुल गांधी के पिछले साल 1 जुलाई को लोकसभा में दिए बयान से शुरू हुआ। राहुल ने कहा था, जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे 24 घंटे हिंसा, नफरत और झूठ में लिप्त रहते हैं। इस टिप्पणी की तीखी आलोचना हुई और मीडिया में व्यापक कवरेज हुआ। रौशन सिन्हा ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की एक तस्वीर पोस्ट की और उसमें नीचे लिखा, जो हिंदू हैं वे हिंसक हैं: राहुल गांधी। इस पोस्ट के बाद कांग्रेस समर्थक वेंकट नाइक ने 2 जुलाई, 2024 को हैदराबाद के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में रौशन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352, 353(2), 353(1)(सी) और 336(4) के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट से स्थानांतरित करने की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालतों का इस्तेमाल वास्तविक कानूनी समाधान के बजाय अखबारों की सुर्खियां बनाने के लिए किया जा रहा है।
गौरतलब है कि ये स्थानांतरण याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। इसमें उन्होंने वक्फ अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी।