फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court News Updates hearing on SBI plea seeking extension to disclose details of electoral Bonds

SC: चुनावी बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, एसबीआई की ब्योरा देने की समयसीमा बढ़ाने की मांग

Mon, 11 Mar 2024 06:39 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Mon, 11 Mar 2024 06:39 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court News Updates hearing on SBI plea seeking extension to disclose details of electoral Bonds
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की उस याचिका पर आज सुनवाई होगी, जिसमें राजनीतिक दलों के भुनाए प्रत्येक चुनावी बॉन्ड का ब्योरा देने की समयसीमा 30 जून तक बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही उस याचिका पर भी सुनवाई होगी, जिसमें एसबीआई के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने पिछले महीने सर्वसम्मति से चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था और एसबीआई को 12 अप्रैल 2019 से अब तक चुनावी बॉन्ड के माध्यम से अंशदान प्राप्त करने वाले राजनीतिक दलों का विवरण 6 मार्च  तक चुनाव आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने आयोग को एसबीआई से जानकारी मिलने के एक हफ्ते में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उसे प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, एसबीआई ने इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट से निर्देशों का पालन करने के लिए 30 जून तक की मोहलत मांगी है।
विज्ञापन


एसबीआई के खिलाफ अवमानना याचिका
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने तय समय 6 मार्च के अंदर चुनावी बॉन्ड का विवरण नहीं देने पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि एसबीआई ने विवरण देने की समयसीमा 30 जून तक बढ़ाने की मांग जानबूझकर की है, ताकि लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी बॉन्ड के जरिये पार्टियों को चंदा देने वालों का ब्योरा सार्वजनिक न हो सके। याचिका में कहा गया है कि एसबीआई का आवेदन दुर्भावनापूर्ण है और इस अदालत की संविधान पीठ से पारित फैसले की जानबूझकर की गई अवज्ञा है। यह अदालत के अधिकार को कमजोर करने का स्पष्ट प्रयास है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चुनावी बॉन्ड योजना फूल प्रूफ नहीं...
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को असांविधानिक घोषित करते हुए कहा था कि चुनावी बॉन्ड योजना फूल प्रूफ नहीं है। इसमें पर्याप्त खामियां हैं जो राजनीतिक दलों को किए गए योगदान का विवरण जानने में सक्षम बनाती हैं। कोर्ट ने कहा था कि किसी भी दानकर्ता के खिलाफ प्रतिशोध या उत्पीड़न राजनीतिक दलों को दिए गए दान को छुपाने का औचित्य या उद्देश्य नहीं हो सकता है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा व जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने अपने फैसले में कहा था, लोकतंत्र कायम है क्योंकि निर्वाचित लोग उन मतदाताओं के प्रति उत्तरदायी होते हैं जो उन्हें उनके कार्यों और निष्क्रियताओं के लिए जवाबदेह ठहराते हैं। यदि निर्वाचित लोग जरूरतमंदों की बात पर ध्यान नहीं देंगे तो क्या हम लोकतंत्र बने रहेंगे? ।


एडीआर समेत चार याचिकाओं पर फैसला...
चुनाव सुधारों व पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से मुहिम चला रहे गैरसरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर), कांग्रेस नेता जया ठाकुर व माकपा की ओर से चार याचिकाएं योजना के विरोध में दायर की गई थीं। पिछले साल 2 नवंबर को संविधान पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने कहा, आम जनता को अब पता चलेगा कि दलों को कौन चंदा दे रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed