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SC Updates: सुप्रीम कोर्ट से अमृतपाल को राहत नहीं, एनएसए के तहत हिरासत में रखे जाने के खिलाफ डाली थी याचिका

Mon, 10 Nov 2025 03:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 10 Nov 2025 03:23 PM IST
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Supreme Court news updates Amritpal Case Air India Crash MP High Court and others
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खालिस्तानी समर्थक प्रचारक और खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत की गई हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
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सर्वोच्च न्यायालय के जज जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने अमृतपाल के वकील को निर्देश दिया कि वे अपने मुवक्किल की याचिका पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से कहा कि वह इस याचिका पर छह हफ्ते के अंदर निर्णय ले।
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वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह वर्तमान में असम के डिब्रूगढ़ जेल में अपने नौ साथियों के साथ एनएसए के तहत बंद हैं।

एआई के खतरे को लेकर सीजेआई सतर्क, कही ये बात
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक झूठा वीडियो चल रहा है, जिसमें अदालत में जूता फेंकने की फर्जी घटना दिखाई गई है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने न्यायपालिका में एआई के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश तय करने संबंधी याचिका पर दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सहमति दी।

याचिका में कहा गया है कि एआई टूल्स के अंधाधुंध उपयोग से न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर खतरा बढ़ सकता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि एआई सिस्टम में डेटा बायस और ब्लैक बॉक्स जैसी समस्याएं हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया अस्पष्ट हो जाती है। सीजेआई ने कहा कि अदालत भी एआई का प्रयोग कर रही है, लेकिन इसकी सीमाओं और दुरुपयोग से सतर्क रहना आवश्यक है।
 

DMK के बाद अब CPI(M) ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, तमिलनाडु में मतदाता सूची संशोधन को बताया असंवैधानिक

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बाद अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने भी तमिलनाडु में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी ने इसे मनमाना, अवैध और असंवैधानिक कहा। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ के सामने पेश हुई याचिका में मांग की गई है कि CPI(M) की याचिका को DMK की याचिका के साथ एकसाथ सुना जाए। DMK की याचिका पर सुनवाई 11 नवंबर को तय है।

सीपीआई(एम) की याचिका राज्य सचिव पी. शनमुगम ने दाखिल की है। इसमें 27 अक्टूबर 2025 को जारी चुनाव आयोग के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसके तहत एक महीने में पूरे राज्य की मतदाता सूची का विशेष संशोधन पूरा करने का निर्देश दिया गया था। याचिका में कहा गया कि इस आदेश के तहत 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक 6.18 करोड़ मतदाताओं का पुन: पंजीकरण कराया जाना है। हर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को प्रतिदिन लगभग 500 घरों का दौरा करने का लक्ष्य दिया गया है, जो याचिकाकर्ता के अनुसार मानव रूप से असंभव है।

इसके अलावा, संपूर्ण प्रक्रिया जांच, दावे-आपत्तियों का निपटारा और अंतिम सूची प्रकाशन केवल 102 दिनों में समाप्त करने की समयसीमा को मनमाना और अव्यावहारिक बताया गया है। पार्टी ने इसे शक्ति के रंगीन उपयोग और संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण कहा है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग का यह कदम ‘सहकारी संघवाद’ की भावना के खिलाफ है और राज्य सरकार को केवल केंद्र द्वारा तय प्रक्रिया का क्रियान्वयनकर्ता बना देता है। सीपीआई(एम) ने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता, विशेष रूप से गरीब, प्रवासी और हाशिये पर रहने वाले वर्गों के लोग मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर अधिकारियों को “संदिग्ध विदेशी नागरिकों” की पहचान करने के अधिकार देकर अघोषित एनआरसी जैसा कदम उठाया है, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। याचिका में चुनाव आयोग के 24 जून और 27 अक्तूबर 2025 के आदेशों को संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के खिलाफ बताया गया है और उन्हें निरस्त करने की मांग की गई है।

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