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सुप्रीम कोर्ट: राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के मुद्दे पर 14 राज्यों ने दिया जवाब, पढ़ें SC की खबरें

Tue, 22 Nov 2022 07:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 22 Nov 2022 07:46 PM IST
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Supreme Court News Update Bombay High Court Anand Teltumbde Bhima Koregaon case Latest Court Samachar
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

भीमा कोरेगांव मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोपी आनंद तेलतुंबडे को जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ NIA ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार यानी 25 नवंबर को मामले की सुनवाई के लिए राजी हो गया है।

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इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 नवंबर को भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी आनंद तेलतुंबडे को जमानत दे दी थी। उन्हें एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई थी। एनआईए के सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के लिए आदेश पर रोक लगा दी थी।
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तेलतुंबडे को अप्रैल 2020 में गिरफ्तार किया गया था।  आनंद तेलतुंबडे वर्तमान में नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। एक विशेष कोर्ट के जमानत देने से इनकार करने के बाद तेलतुंबडे ने पिछले साल हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में किया गया था कि वह 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे और उन्होंने कोई भड़काऊ भाषण भी नहीं दिया था।
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दरअसल, एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव लड़ाई के 200 साल पूरे होने के मौके पर एक कार्यक्रम में हिंसा भड़क गई थी। इसमें एक की मौत हो गई थी और 10 पुलिसकर्मियों सहित कई घायल हो गए थे। भीमा-कोरेगांव में झड़पों के बाद जनवरी में राज्यव्यापी बंद के दौरान पुलिस ने 162 लोगों के खिलाफ 58 मामले दर्ज किए थे।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 82 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता पी वरवरा राव को जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अंतरिम आदेश में भीमा कोरेगांव के एक अन्य आरोपी गौतम नवलखा को उनकी स्वास्थ्य स्थिति और वृद्धावस्था को देखते हुए एक महीने की अवधि के लिए घर में नजरबंद रखने की अनुमति दी थी। 

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सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

क्रिश्चियन मिशेल की जमानत याचिका पर 28 नवंबर को सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जमानत याचिका पर 28 नवंबर को सुनवाई करेगा। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हो सकती है। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala
चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन पर याचिका पर सुनवाई छह दिसंबर को 
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन से संबंधित एक नई याचिका की सुनवाई के लिए 6 दिसंबर की तारीख तय की। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनावों के दौरान 15 अतिरिक्त दिनों के लिए चुनावी बॉन्ड की बिक्री की अनुमति के लिए योजना में संशोधन किया गया है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया कि उन्होंने कुछ अतिरिक्त आधार लिए हैं। इस मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 6 दिसंबर को एक कांग्रेसी नेता की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें हालिया अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी बॉन्ड की बिक्री को 15 दिन और बढ़ा दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली और जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि वह 2018 की चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली अन्य लंबित याचिकाओं के साथ कांग्रेस नेता जया ठाकुर की नई याचिका पर 6 दिसंबर को सुनवाई करेगी।

राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बॉन्ड को पेश किया गया है। सरकार ने 2 जनवरी, 2018 को चुनावी बांड योजना को अधिसूचित किया था। योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बांड ऐसे व्यक्ति द्वारा खरीदा जा सकता है, जो भारत का नागरिक है या भारत में निगमित या स्थापित निकाय है। एक व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से चुनावी बांड खरीद सकता है।
 

राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के मुद्दे पर सुनवाई

केंद्र ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के मुद्दे पर सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें की हैं और 14 राज्यों ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसने कहा कि शेष 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की टिप्पणियां नहीं मिली हैं और चूंकि मामला संवेदनशील प्रकृति का है और इसके दूरगामी प्रभाव होंगे, इसलिए उन्हें अपने विचारों को अंतिम रूप देने में सक्षम बनाने के लिए कुछ और समय दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए एस ओका की पीठ ने केंद्र को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। शीर्ष अदालत ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया जिसमें कहा गया है कि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मुद्दे पर अपनी राय बनाने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है। स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी टिप्पणी दी है।
 

अदालत ने कहा, हम राज्य का इंतजार नहीं कर सकते...

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ट्रक के हेल्पर को जमानत दे दी, जिस पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत आरोप लगाया गया था। ओडिशा सरकार राहत के लिए उसकी याचिका पर जवाब दाखिल करने में विफल रही थी जिसके बाद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति एस के कौल और अभय एस ओका की पीठ ने कहा कि आरोपी 18 महीने से अधिक समय से हिरासत में है। नोटिस अक्टूबर में जारी किया गया था, इसके बावजूद राज्य के वकील ने जवाब दाखिल नहीं किया।

अदालत ने कहा, हम पाते हैं कि नोटिस 26 अक्टूबर, 2022 को दिया गया था और प्रतिवादी के वकील ने आज कहा कि राज्य ने उन्हें कल ही निर्देश दिया है। यदि राज्य के पास समय पर निर्देश जारी करने का समय नहीं है, तो हमारे पास राज्य के लिए इंतजार करने का समय नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल वाहन का खलासी ही था जो भागा नहीं, जबकि अन्य सभी भाग गए और अभी भी पकड़े नहीं गए हैं। आरोपी 21 मार्च, 2021 से यानी डेढ़ साल से अधिक समय से हिरासत में है। इन तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर हम अपीलकर्ता को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए नियम और शर्तों पर जमानत देते हैं। 
 
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