एनईईटी-एक में शामिल होने वाले छात्र एनईईटी-दो में भी हो सकते हैं सम्मिलित: कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि देशभर के कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिला सिर्फ नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट (एनईईटी) के द्वारा ही होगा। यानी राज्य और निजी मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए अपनी परीक्षाएं नहीं ले सकते। शीर्ष अदालत ने कुछ राज्यों और कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा दाखिल याचिकाओं को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है। अल्पसंख्यक संस्थान भी एनईईटी के दायरे में होंगे।
साथ ही शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल न होने वाले और जिन छात्रों को ऐसा लगता है कि उन्होंने एनईईटी-एक परीक्षा में अच्छा परफार्म नहीं किया है, वैसे छात्र एनईईटी-दो परीक्षा में बैठ शामिल हो सकते हैं। छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह आदेश दिया है। मालूम हो कि 24 जुलाई को एनईईटी-दो परीक्षा आयोजित होनी है।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने पूर्व आदेश में फेरबदल करते हुए कहा कि जो छात्र एक मई को आयोजित होने वाले एनईईटी-एक में शामिल नहीं हो सके थे, वैसे छात्र एनईईटी-दो में शामिल हो सकते हैं। साथ ही पीठ ने यह ही आदेश दिया है कि एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हुए वैसे छात्र जिन्हें यह आशंका है कि उनकी तैयारी अच्छी नहीं थी, वे भी एनईईटी-दो में बैठ सकते हैं। लेकिन ऐसे छात्रों के लिए एनईईटी-एक की उम्मीदवारी छोडनी पड़ेगी।
परीक्षा की तारीख में हो सकता है बदलाव
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार, सीबीएसई और मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) चाहे तो 24 जुलाई को होने वाली एनईईटी-दो परीक्षा की तारीख में बदलाव कर सकते हैं।
मालूम हो कि उत्तर प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उन्हें अपने यहां प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की इजाजत मिलनी चाहिए। कई राज्य यह कहते हुए एनईईटी का विरोध कर रहे थे कि उनके छात्र एनईईटी की परीक्षा देने की स्थिति में नहीं है। कई राज्यों का कहना था कि क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा नहीं होने के कारण उनके छात्रों को बहुत परेशानी होगी।
वहीं जम्मू एवं कश्मीर, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का कहना था कि उन्हें अपने राज्यों में प्रवेश परीक्षा करने का अधिकार मिला हुआ है। ये राज्य कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दे रही हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भी सुप्रीम कोर्ट की याचिका दाखिल कर एनईईटी का विरोध किया था । याचिका में कहा गया था कि उनकेमॉयनोरिटी स्टेटस का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लिहाजा उन्हें एनईईटी से छूट दी जाए। लेकिन कोर्ट ने इन सभी की दलीलों को मानने से इनकार कर दिया।