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सुप्रीम कोर्ट: संविधान पीठ को सौंपा गया दिल्ली के अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का मामला, 11 मई को पांच जजों वाली बेंच करेगी सुनवाई
Fri, 06 May 2022 11:05 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Fri, 06 May 2022 11:05 AM IST
सार
इस मामले पर पांच जलों वाली संविधान पीठ 11 मई को सुनवाई करेगी। दिल्ली सरकार अधिकारियों पर पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रही है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच फैला विवाद अब संविधान पीठ के पास पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए इस मसले को संविधान पीठ को सौंप दिया है। अब 11 मई को पांच जजों वाली बेंच इस मसले की सुनवाई करेगी। इसके साथ ही कार्ट ने कहा है कि, इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा। इसलिए कोई भी पक्ष सुनवाई टालने के लिए आवेदन न करे।
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दरअसल, दिल्ली सरकार अधिकारियों पर पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रही है। इसको लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई चल रही है। उधर, केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को संविधान पीठ को सुनवाई के लिए रेफर करनी की मांग की थी।
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ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार उपराज्यपाल के पास
बता दें कि पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में संशोधन के बाद से दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार एलजी यानी उपराज्यपाल के पास है। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ये मामला दिल्ली अधिनियम से हुए संशोघन से भी जुड़ा है। दिल्ली सरकार इस संशोधन का विरोध कर रही है।
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पहले दो सदस्यीय पीठ ने की थी सुनवाई
इस याचिका पर सबसे पहले दो सदस्यी पीठ ने सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले के लिए तीन सदस्यीय बेंच के गठन की सिफारिश की थी। 14 फरवरी 2019 को जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण ने सीजेआई से सिफारिश की थी कि सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय बेंच गठित की जाए। यह दोनों जज अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब यह मामला संविधान पीठ को भेजा गया है, जिस पर पांच जजों की बेंच सुनवाई करेगी।
सुनाए थे अलग-अलग फैसले
पूर्व में सुनवाई करते हुए जस्टिस भूषण ने फैसला सुनाया था कि दिल्ली सरकार के पास किसी भी प्रशासनिक सेवा का अधिकार नहीं है। हालांकि, जस्टिस सीकरी ने कहा था कि संयुक्त निदेशक या इससे ऊपर के अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकारी केवल केंद्र सरकार के पास हो सकता है। वहीं अन्य प्रशासनिक पदों पर मतभेद की स्थिति में लेफ्टिनेंट गवर्नर का निर्णय मान्य होगा।
सिर्फ एक सदस्य से नहीं बन सकती पीठ : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की छह सर्किट बेंचों के न्यायिक और प्रशासनिक सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के चलते काम नहीं करने को गंभीरता से लिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से शुक्रवार को कहा कि आप एक सदस्य से पीठ गठित नहीं कर सकते हैं।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस सूर्यकांत की पीठ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (प्रधान बेंच) बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई। केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस मुद्दे पर नोटिस जारी कर रहे हैं। लखनऊ, जबलपुर, कटक, जम्मू और श्रीनगर समेत कैट की छह बेंचों में मात्र एक सदस्य है। आप एक सदस्य के साथ पीठ गठित नहीं कर सकते हैं।