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Hijab Ban: कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध पर जल्द आ सकता है बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट इसी सप्ताह सुना सकता है आदेश

Mon, 10 Oct 2022 01:03 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 10 Oct 2022 01:03 PM IST
सार

हिजाब विवाद मामले में जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की पीठ ने 10 दिन तक सुनवाई के बाद 22 सितंबर को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

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Supreme Court likely to pronounce verdict in Karnataka hijab ban case News in Hindi
हिजाब विवाद (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक के हिजाब विवाद में दायर याचिकाओं पर इस हफ्ते निर्णय सुना सकती है। कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं। हाईकोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहन कर आने पर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया था।

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जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के तर्क 10 दिन तक सुनने के बाद 22 सितंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी। जस्टिस गुप्ता 16 अक्तूबर को रिटायर होने जा रहे हैं, उन्हीं की अध्यक्षता में मामला सुना गया है। इसी वजह से इस हफ्ते निर्णय आने की उम्मीद है।
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हिजाब विवाद में दोनों पक्षों की दलीलें यह थीं
याची

  • कक्षा में हिजाब पहनने से रोक कर मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा खतरे में डाली जा रही है। वे स्कूल आना बंद कर देंगी।
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  • सरकार द्वारा हिजाब पर प्रतिबंध का आदेश देना गलत है।
  • मामले को 5 जजों की सांविधानिक पीठ के सुपुर्द कर देना चाहिए।

कर्नाटक सरकार

  • सरकार के जिस आदेश पर यह विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह तो धर्म-निरपेक्ष है।
  • कुछ लोगों द्वारा शिक्षण संस्थानों में खड़ा किया गया यह विवाद स्वाभाविक नहीं है।
  • सरकार अपने सांविधानिक कर्तव्य पथ से भटकने की दोषी मानी जाती अगर उसने संबंधित आदेश न जारी किया होता।

पृष्ठभूमि

  • कर्नाटक सरकार ने 5 फरवरी 2022 को आदेश दिया कि स्कूलाें वे ऐसे कपड़े पहन कर कोई नहीं आ सकता, जिससे स्कूल-कॉलेजों में व्यवस्था बिगड़े। उडुपी की सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी की कुछ मुस्लिम लड़कियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कक्षाओं में हिजाब पहन कर बैठने देने की अनुमति मांगी। 15 मार्च को हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी।

राजस्थान सरकार को फटकार लगाई, कोविड का मुआवजा देकर कोई दान नहीं कर रहे हो

  • कोविड-19 महामारी में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देकर सरकार कोई दान नहीं कर रही है। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान सरकार को डांट लगाई। सरकार ने मुआवजे पर हलफनामे दाखिल किया, जिस पर कोर्ट ने असंतोष जताया। कहा, इस बारे में शुक्रवार तक विस्तृत जवाब दे।
  • सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि वह जरूरी कदम उठा रही है। इस पर जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने कहा कि वह पहले भी आश्वासन देती आई है। कोविड प्रभावितों से सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार होना चाहिए। मामले में गौरव बंसल नामक वकील ने याचिका दायर कर बताया था कि 2021 में दिए आदेश का सरकार पालन नहीं कर रही है। आदेश के तहत कोविड से मारे गए लोगों के परिजनों को 50 हजार रुपये मुआवजा मिलना है। सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा था, कोई राज्य मुआवजे से इनकार नहीं कर सकता
पिछले वर्ष 4 अक्तूबर को कोर्ट ने आदेश दिया था कि कोई राज्य मृतकों के परिजनों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकता। चाहे मृतक के मृत्यु प्रमाणपत्र पर मौत की वजह कोविड वायरस लिखी हो या नहीं। साथ ही चिंता जताई थी कि राज्य मुआवजा देने के फर्जी दावे कर रहे हैं। राहत के निर्देश का ऐसा दुरुपयोग हो सकता है, उसने सोचा तक नहीं था।

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