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Arbitration: 'अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों से निपटने में मध्यस्थता जरूरी', जस्टिस हिमा कोहली ने कही यह बात

Sun, 24 Mar 2024 03:46 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 24 Mar 2024 03:46 PM IST
सार

जस्टिस कोहली ने कहा कि भारत व्यापार और वैश्विक लेनदेन में सबसे आगे है और विवाद तो पैदा होना ही था। ऐसे विवादों का सबसे तेज और आसान समाधान मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक विवाद समाधानों के माध्यम से ही होगा।

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supreme court judge Hima Kohli said India poised to be premier destination for commercial arbitration
न्यायमूर्ति हिमा कोहली। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय न्यायपालिका बीते काफी समय से मध्यस्थता के जरिए विवादों को निपटाने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में शीर्ष कोर्ट की न्यायधीश हिमा कोहली ने भी कहा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाणिज्यिक मध्यस्थता के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में उभरने के लिए तैयार है। उत्तरी गोवा के वागाटोर में भारतीय मध्यस्थता परिषद (आईसीए) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने यह भी कहा कि विवादों का सबसे त्वरित और आसान समाधान मध्यस्थता के जरिए ही हो सकता है। वे इस सम्मेलन में 'वाणिज्यिक विवादों में मध्यस्थता और मध्यस्थता के माध्यम से न्याय में आसानी' विषय पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधन दे रही थीं। 
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उन्होंने कहा कि भारत व्यापार और वैश्विक लेनदेन में सबसे आगे है और विवाद तो पैदा होना ही था। ऐसे विवादों का सबसे तेज और आसान समाधान मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक विवाद समाधानों के माध्यम से ही होगा। अर्थव्यवस्था को चालू रखने और बेहतर करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को लागू करना जरूरी है। जस्टिस हिमा कोहली ने आगे कहा कि आईसीए लंबे समय से एडीआर, विशेष रूप से मध्यस्थता का प्रचार कर रहा है।
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जस्टिस कोहली ने कहा कि अदालती मुकदमेबाजी को प्राथमिक फोकस होना चाहिए, लेकिन अगर विकल्प अच्छी तरह से विकसित किए जाते हैं, तो इससे अदालत पर बोझ कम हो जाएगा। यह निर्णय लेने को सुनिश्चित करता है और विवादित पक्षों के बीच समझौता लाता है। इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में, वैश्वीकरण के कारण, सब कुछ तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इससे व्यावसायिक लेन-देन में वृद्धि हुई है। व्यवसाय सांस्कृतिक और भौगोलिक सीमाओं के पार फैल गया है। साथ ही, इसने कई तरह की कानूनी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। इसके चलते विवाद समाधान अधिक जटिल हो गया है। इतना ही नहीं, ये विवाद न केवल संबंधित पक्षों को बल्कि वैश्विक समुदाय को भी प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्यवसायों के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उभरा है। 
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