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मृत्युदंड के लिए फांसी की सजा पर हो पुनर्विचार, केंद्र सरकार 3 महीने में दे जवाब: सुप्रीम कोर्ट

Sat, 07 Oct 2017 05:27 AM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा Updated Sat, 07 Oct 2017 05:27 AM IST
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Supreme Court issues notice to Government of india on replacement for death by hanging
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मृत्युदंड की सजा के रूप दी जाने वाली फांसी की सजा देने के तरीके में बदलाव की एक याचिका की सुनवाई करते हुए भारत सरकार से तीन महीने में जबाव मांगा है। 
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याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा संविधान हर किसी को जीने का और सम्मान से मरने का अधिकार देता है।
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कोर्ट ने आगे कहा है कि आधुनिक समय में कई तरीकों के अविष्कार के साथ मौत की सजा पर विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने विधायिका को मौत की सजा के लिए विभिन्न आधुनिक तरीकों के बारे में सोचना और विचार करना चाहिए। 
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पढ़ें:  फांसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, गोली और जहर से दी जाए सजा-ए-मौत

बता दें कि पिछले काफी समय से फांसी की सजा के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ऋषि मल्होत्रा ने अपनी याचिका में अदालत से यह दरख्वास्त की थी कि सजा-ए-मौत के तरीके पर विचार किए जाने की जरूरत है।
 

सुप्रीम कोर्ट इसी याचिका पर विचार करते हुए भारत सरकार से तीन महीने में जबाव मांगा है

Supreme Court issues notice to Government of india on replacement for death by hanging
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट इसी याचिका पर विचार करते हुए भारत सरकार से तीन महीने में जबाव मांगा है।  वकील ऋषि ने फांसी की सजा दिए जाने के बारे में लिखा था कि इसमें करीब 40 मिनट का समय लगता है और मौत बेहद दर्दनाक होती है। अगर एक दोषी को गोली मारकर या जहर देकर मौत दी जाए तो इसमें कम समय लगेगा और उसे ज्यादा दर्द भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में गोली और जहर से मौत देने के तरीके उपयोग किए जाते हैं। जबकि हमारे देश में अब भी मौत की सजा पाए दोषी को फांसी दी जाती है। 

दरअसल, आईपीसी की धारा 353 (5) में मल्होत्रा ने बदलाव की मांग की है, जिसके मुताबिक दोषी के गले में रस्सी डालकर और फिर लटका कर मौत दी जाती है। उन्होंने कहा कि मौत दिए जाने का सम्माजनक तरीका होना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन भी फांसी की सजा को अमानवीय मानते हैं और इसके खिलाफ हैं। हालांकि कई संगठन तो मौत की सजा देने की ही खिलाफत करते हैं।
 
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