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राफेल व अवमानना याचिका को पीठ के आदेश के बावजूद एक साथ सूचीबद्ध न करने पर सुप्रीम कोर्ट हैरान

Mon, 06 May 2019 10:12 PM IST
अमर शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 06 May 2019 10:12 PM IST
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Supreme Court is shocked as Rafael and contempt petition are not listed together despite bench order
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई है कि राफेल पुनर्विचार याचिका और राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका को सुनवाई के लिए एक साथ सूचीबद्ध नहीं किया गया। 
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि यह हैरत की बात है कि दोनों याचिकाओं को एकसाथ सुनवाई के लिए क्यों सूचीबद्ध नहीं किया। पीठ ने कहा कि यह चौकाने वाली बात है कि हमारे आदेश के बावजूद राहुल गांधी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को सूचीबद्ध नहीं किया गया। यह कहते हुए पीठ ने सुनवाई 10 मई के लिए टाल दी। उस दिन राफेल को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका और अवमानना मामले की सुनवाई एकसाथ होगी।
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मालूम हो कि मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। लेखी का कहना है कि राहुल ने 'चौकीदार चोर है' वाला बयान सुप्रीम कोर्ट के मुंह में डाल दिया, लिहाजा उन पर अवमानना की कार्यवाही चलनी चाहिए।
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हालांकि राहुल गांधी ने हलफनामा दायर कर अपनी गलती मानते हुए अपने इस बयान पर खेद जताया था। लेकिन राहुल के इस हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं है। जिसके बाद राहुल के वकील ने कहा कि वह अपने इस बयान के लिए माफी मांगते हैं। राहुल को हलफनामे के जरिए अब माफीनामा देना है।


वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा व अरूण शौरी सहित अन्य ने राफेल मसले पर गत वर्ष 14 दिसंबर के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की है। याचिकाकर्ता ने इससे संबंधित कुछ अन्य दस्तावेज पेश करते हुए इस पर परीक्षण करने की गुहार की थी। केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उन दस्तावेजों पर गौर करने का निर्णय लिया है।
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