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Supreme Court: 'अब भारतीय सेना की महिला अफसरों को स्थायी कमीशन', शॉर्ट सर्विस मामले में अदालत का अहम फैसला
Tue, 24 Mar 2026 11:45 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:45 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन महिला अधिकारियों को न्याय दिया है, जिन्हें सेना में स्थायी कमीशन देने से वंचित रखा गया था। अदालत ने भविष्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चयन प्रक्रिया की समीक्षा के निर्देश भी दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेवा देने वाली महिला अधिकारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सेना में महिलाओं के खिलाफ होने वाले प्रणालीगत भेदभाव को स्वीकार करते हुए अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों (अनुच्छेद 142) का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने उन महिलाओं के पक्ष में फैसला दिया जिन्हें स्थायी कमीशन से वंचित रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक जिन महिला अधिकारियों ने अपनी सेवा से हटाए जाने को लेकर अदालत में चुनौती दी थी, उन्हें 20 साल की सेवा के बराबर पेंशन पाने का हकदार माना जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सेना में महिलाओं के खिलाफ प्रणालीगत भेदभाव की वजह से उन्हें स्थायी कमीशन नहीं मिल पाया।
सेना में पुरुषों के एकाधिकार नहीं हो सकता
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सेना में केवल पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता। जस्टिस ने साफ किया कि पुरुष अधिकारी यह उम्मीद नहीं कर सकते कि भविष्य के सभी खाली पद केवल उनके लिए ही होंगे। कोर्ट के अनुसार, अवसरों की कमी और गलत तरीके से अयोग्य ठहराए जाने के कारण महिला अधिकारियों की योग्यता और उनके करियर की प्रगति पर बुरा असर पड़ा है।
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ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होगा', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
किन पर लागू होगा यह आदेश?
यह फैसला उन महिला अधिकारियों के लिए एक बार का उपाय के रूप में आया है जो कानूनी लड़ाई के दौरान सेवा से मुक्त हो गई थीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आदेश जेएजी (जज एडवोकेट जनरल) और एईसी (आर्मी एजुकेशन कोर) कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, कोर्ट ने भविष्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चयन के तरीकों और कट-ऑफ नियमों की समीक्षा करने का भी निर्देश दिया है।
क्या है मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कई महिला अधिकारी जिनमें 'ऑपरेशन सिंदूर' का हिस्सा रहीं अधिकारी भी शामिल थीं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले स्पष्ट आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार और सेना स्थायी कमीशन देने में पुरुषों के मुकाबले उनके साथ भेदभाव कर रही है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अब यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
अन्य वीडियो-
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सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक जिन महिला अधिकारियों ने अपनी सेवा से हटाए जाने को लेकर अदालत में चुनौती दी थी, उन्हें 20 साल की सेवा के बराबर पेंशन पाने का हकदार माना जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सेना में महिलाओं के खिलाफ प्रणालीगत भेदभाव की वजह से उन्हें स्थायी कमीशन नहीं मिल पाया।
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सेना में पुरुषों के एकाधिकार नहीं हो सकता
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सेना में केवल पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता। जस्टिस ने साफ किया कि पुरुष अधिकारी यह उम्मीद नहीं कर सकते कि भविष्य के सभी खाली पद केवल उनके लिए ही होंगे। कोर्ट के अनुसार, अवसरों की कमी और गलत तरीके से अयोग्य ठहराए जाने के कारण महिला अधिकारियों की योग्यता और उनके करियर की प्रगति पर बुरा असर पड़ा है।
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किन पर लागू होगा यह आदेश?
यह फैसला उन महिला अधिकारियों के लिए एक बार का उपाय के रूप में आया है जो कानूनी लड़ाई के दौरान सेवा से मुक्त हो गई थीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आदेश जेएजी (जज एडवोकेट जनरल) और एईसी (आर्मी एजुकेशन कोर) कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, कोर्ट ने भविष्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चयन के तरीकों और कट-ऑफ नियमों की समीक्षा करने का भी निर्देश दिया है।
क्या है मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कई महिला अधिकारी जिनमें 'ऑपरेशन सिंदूर' का हिस्सा रहीं अधिकारी भी शामिल थीं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले स्पष्ट आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार और सेना स्थायी कमीशन देने में पुरुषों के मुकाबले उनके साथ भेदभाव कर रही है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अब यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
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