{"_id":"5be874aebdec2269774f1116","slug":"supreme-court-hearing-on-cbi-chief-alok-verma-case-today","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीआई विवाद: सीवीसी ने सुप्रीम कोर्ट को देर से सौंपी रिपोर्ट, सॉलिसीटर जनरल ने माफी मांगी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सीबीआई विवाद: सीवीसी ने सुप्रीम कोर्ट को देर से सौंपी रिपोर्ट, सॉलिसीटर जनरल ने माफी मांगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 12 Nov 2018 02:53 AM IST
विज्ञापन
आलोक वर्मा-राकेश अस्थाना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा के खिलाफ अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सोमवार को सीलबंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय में दाखिल की। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया और मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को नियत की।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव ने भी एजेंसी प्रमुख के तौर पर 23 अक्टूबर के बाद से अब तक किए गए अपने फैसलों के बारे में रिपोर्ट दाखिल की। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश ए के पटनायक ने सीवीसी जांच की निगरानी की, जो 10 नवंबर को पूरी हुई। सीजेआई ने कहा कि रजिस्ट्री रविवार को भी खुली हुई थी, लेकिन रिपोर्ट दाखिल करने के संबंध में रजिस्ट्रार को कोई सूचना नहीं दी गई।
विज्ञापन
बाद में सॉलिसीटर जनरल ने माफी मांगी और कहा कि यद्यपि वह परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट सौंपने में उनकी तरफ से विलंब हुआ।
विज्ञापन
बता दें कि रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई प्रमुख वर्मा और जांच एजेंसी में नंबर दो राकेश अस्थाना को 23 अक्तूबर को छुट्टी पर भेज दिया गया था। अस्थाना ने वर्मा पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे। इसके बाद सीवीसी ने इस मामले की जांच शुरू की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी के लिए पूर्व जस्टिस एके पटनायक को नियुक्त किया था। कोर्ट ने मामले की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सीबीआई निदेशक वर्मा सीवीसी प्रमुख केवी चौधरी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं और अपना बयान रिकॉर्ड कराया था। वर्मा अपने ऊपर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
कैसे हुई विवाद की शुरुआत
सीबीआई के दोनों अधिकारियों वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं सीबीआई ने अपने नंबर दो के अधिकारी के खिलाफ 15 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की थी। वहीं अस्थाना ने 24 अगस्त को वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। कैबिनेट सचिव ने अस्थाना की शिकायत को सीवीसी के पास भेज दिया था।
अस्थाना की शिकायत के दो महीने बाद सीबीआई ने उनके, सीबीआई डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के खिलाफ 15 अक्तूबर को सतीश बाबू के 4 अक्तूबर को दिए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। अस्थाना ने वर्मा पर हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये घूस के तौर पर लेने का आरोप लगाया है। सना से जांच एजेंसी मीट निर्यातक मोईन कुरैशी से संबंधित मामलों में पूछताछ कर रही थी।
सना का दावा है कि उसने पूछताछ से बचने के लिए सीबीआई के विशेष निदेशक अस्थाना को 3 करोड़ रुपये की घूस दी थी। अस्थाना से उनकी डील दो भाईयों सोमेश और मनोज प्रसाद ने करवाई थी। उनका कहना था कि यदि वह 5 करोड़ रुपये दे देगा तो उसे इस मामले से राहत मिल जाएगी। जिसके लिए वह तीन करोड़ रुपये इन भाईयों को दे चुका था। इसके अलावा सना ने दिल्ली में अस्थाना से मुलाकात करने का दावा किया था।
Supreme Court defers the hearing till Friday after Central Vigilance Commission (CVC) submits inquiry report regarding CBI director Alok Verma, in a sealed cover https://t.co/cZ7ROf2mMz
— ANI (@ANI) November 12, 2018