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'आखिरी बार आठ सप्ताह का समय दे रहे': सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकारा- अब अवमानना की कार्रवाई करेंगे

Fri, 02 Oct 2026 01:57 PM IST
नितिन गौतम एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 02 Oct 2026 01:57 PM IST
सार

पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने गंगा के बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण और अवैध ढांचे हटाने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है और आदेश का पालन न होने पर कार्रवाई करने की बात भी कही है। 

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Supreme court grants eight weeks to Bihar to remove encroachments from Ganga flood plains in Patna
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पटना में नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के बाढ़ क्षेत्र में बने सभी अवैध ढांचों और अतिक्रमण को हटाने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि 21 जुलाई को शीर्ष अदालत ने राज्य को छह सप्ताह का समय दिया था, ताकि नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के बाढ़ क्षेत्र में मौजूद अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाया जा सके।
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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
28 सितंबर को बिहार के महाधिवक्ता एस. डी. संजय ने पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत के निर्देशों का आंशिक पालन हुआ है। हालांकि उन्होंने कहा कि नेपाल में आई हालिया प्राकृतिक आपदा के कारण गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे यह पूरा इलाका जलमग्न हो गया और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। इस पर पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा, 'हम अंतिम बार आठ सप्ताह का समय देते हैं। अगर निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो हमें बिहार के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को तलब करना पड़ेगा और अवमानना की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।'
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एनजीटी के आदेश के खिलाफ दायर की गई है याचिका
पीठ ने आगे कहा, 'आठ सप्ताह के बाद, यानी अगली सुनवाई पर, हम अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्ण अनुपालन रिपोर्ट चाहते हैं। इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा।' शीर्ष अदालत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के जून 2020 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी।
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28 सितंबर के आदेश में पीठ ने यह भी कहा कि मामले में कुछ हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि निर्माण उनकी निजी जमीन पर है और वह बाढ़ क्षेत्र में नहीं आता। पीठ ने कहा, 'ऐसे हस्तक्षेपकर्ता सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन दे सकते हैं।'


अदालत ने साफ किया कि अगर कोई हस्तक्षेपकर्ता अभ्यावेदन देता है, तो उसे भूमि के स्वामित्व से जुड़े सभी दस्तावेज, निर्माण की स्वीकृति और अन्य आवश्यक अनुमतियां संलग्न करनी होंगी। इन दस्तावेजों के बिना किसी भी अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। जुलाई में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध निर्माण को गंभीर चिंता का विषय बताया था और बिहार सरकार को छह सप्ताह के भीतर नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच सभी अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था।
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