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Supreme Court: बाबुलनाथ मंदिर विवाद पर 'सुप्रीम' फैसला, साधु को खाली करना होगा कब्जा; पर मिली चार साल की मोहलत

Sun, 15 Feb 2026 06:54 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 15 Feb 2026 06:54 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर से जुड़े कब्जा विवाद में 75 वर्षीय साधु को मंदिर परिसर का हिस्सा खाली करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा, लेकिन उम्र और धार्मिक जीवन को देखते हुए चार साल की मोहलत दी। यह विवाद सीढ़ियों के पास छोटे हिस्से के कब्जे को लेकर था।

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Supreme Court gives monk four years to evict part of centuries old Babulnath Temple of Mumbai
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुंबई के सदियों पुराने बाबुलनाथ मंदिर परिसर से जुड़े कब्जे के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 75 साल के एक साधु को मंदिर की सीढ़ियों के पास घिरे हिस्से को खाली करने का आदेश दिया है। हालांकि उनकी उम्र और धार्मिक जीवन को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें जगह खाली करने के लिए चार साल का समय दिया है। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेश को भी बरकरार रखा है।
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यह विवाद मंदिर की मुख्य सीढ़ियों के लैंडिंग एरिया के एक छोटे हिस्से को लेकर था, जहां साधु पक्ष लंबे समय से रह रहा था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों ने तथ्यों और कानून के आधार पर सही फैसला दिया था, इसलिए उसमें दखल देने की जरूरत नहीं है। साधु जगन्नाथ गिरी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी।
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चार साल की राहत, उम्र और धार्मिक जीवन का रखा ध्यान
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर इतनी लंबी मोहलत नहीं दी जाती, लेकिन इस मामले में साधु की उम्र 75 साल है और वह धार्मिक व आध्यात्मिक जीवन जी रहे हैं। इस कारण उन्हें वैकल्पिक ठिकाना खोजने के लिए चार साल का समय दिया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक वह वहां रहें, शांति बनाए रखें और मंदिर के विकास कार्य में कोई रुकावट न डालें। साथ ही मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया गया कि उस जगह पर कोई तीसरा व्यक्ति कब्जा न करे और साधु को परेशान न किया जाए।

मामले का पूरा कानूनी इतिहास
रिकॉर्ड के अनुसार यह हिस्सा 1927 में बाबा रामगिरि महाराज को दिया गया था। उनके निधन के बाद उनके शिष्य बाबा ब्रह्मानंदजी महाराज वहां रहने लगे। 1996 में मंदिर ट्रस्ट ने बेदखली के लिए मुंबई की स्मॉल कॉज कोर्ट में केस किया और कोर्ट ने ट्रस्ट के पक्ष में फैसला दिया। 2001 में अपील भी खारिज हो गई। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां नवंबर 2025 में याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई, जिसे अब अंतिम रूप से खारिज करते हुए चार साल में जगह खाली करने का आदेश दिया गया है।

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