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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख को व्यक्तिगत पेशी से दी छूट, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस

Fri, 24 Jan 2020 08:13 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 24 Jan 2020 08:13 PM IST
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Supreme Court gives exemption from personal appearance to Sahara chief Subrata Roy
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सहारा प्रमुख सुब्रत राय और समूह के दो निदेशकों को अगले आदेश पर व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। सहारा प्रमुख पर निवेशकों की रकम लौटाने के लिए सेबी-सहारा खाते में 25700 करोड़ रुपये जमा नहीं करने का मामला चल रहा है। सुब्रत राय व दोनों निदेशक रवि शंकर दूबे और अशोक राय चौधरी शुक्रवार को कोर्ट में उपस्थित थे।

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चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ केसमक्ष राय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने सहारा प्रमुख व निदेशकों को पेशी से छूट प्रदान करने की गुहार की। पीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए अगले आदेश तक तीनों को व्यक्तिगत पेशी से छूट प्रदान कर दी। 
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यह पीठ पहली बार सहारा प्रमुख के मामले पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने वकीलों को इस मामले से संबंधित लंबित मामलों का ब्योरा देने का निर्देश देते हुए कहा कि वह कुछ दिनों में इस मामले पर सुनवाई करेगी और सुनवाई पूरे दिन होगी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ ने कहा कि सुब्रत राय की निगरानी के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के गार्ड को हटा दिया जाए, क्योंकि इसकी जरूरत नहीं है। 
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इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राय निजी गार्ड का इस्तेमाल करते हैं और वह अधिकतर समय दिल्ली पुलिस के जवानों को अपने साथ नहीं रखते हैं, जो अदालती आदेश का उल्लंघन है। लिहाजा पीठ ने इस मसले पर किसी तरह का आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

दिल्ली सरकार को नोटिस
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली सरकार द्वारा सरकारी वकील के वेतन को लेकर लेने के निर्णय को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि सरकारी वकील की नियुक्ति का अधिकार दिल्ली सरकार के पास नहीं है।

केंद्र सरकार को नोटिस
जेल या पुलिस हिरासत में मौत, बलात्कार या लापता होने आदि के मामले की न्यायिक जांच न किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। याचिका मानवाधिकार कार्यकर्ता सुहास चकमा ने दायर की है।


जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने इस याचिका पर केंद्र व राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचिका में सीआरपीसी की धारा-176 (1ए) के अनुपालन की गुहार की गई है। इस धारा के तहत अगर न्यायिक या पुलिस हिरासत में मौत, बलात्कार या लापता होने की घटना होती है तो न्यायिक जांच अनिवार्य है।

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