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सुप्रीम कोर्ट: राजद्रोह कानून पर जवाब देने के लिए केंद्र को दिया दो हफ्ते का समय, नई याचिका पर भी करेगा विचार

Tue, 13 Jul 2021 04:38 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 13 Jul 2021 04:38 AM IST
सार

  • राजद्रोह कानून (भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए) के खिलाफ कुछ और लोगों ने भी याचिकाएं दायर की हैं। पीठ ने कहा कि इन सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई की जाएगी।

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Supreme Court gave to Center has been given two more weeks to respond on sedition law
supreme court - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए और दो हफ्ते का समय दिया है।

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जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब देने के लिए और समय मांगा था। राजद्रोह कानून (भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए) के खिलाफ कुछ और लोगों ने भी याचिकाएं दायर की हैं। पीठ ने कहा कि इन सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई की जाएगी।
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मणिपुर के दो पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा और छत्तीसगढ़ के कन्हैया लाल शुक्ला द्वारा दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल को केंद्र सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा था।
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उन्होंने याचिका में कहा है कि फेसबुक पर की गई टिप्पणी और कार्टून शेयर करने के आरोप में उनके खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए (राजद्रोह) की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर विचार करने का निर्णय लिया है। यह याचिका मैसूर के मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एसजी वोम्बटकेरे ने दायर की है। इसके तहत अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।


चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील पीबी सुरेश को याचिका की एक प्रति अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को देने को कहा है। कोर्ट इस मामले पर बृहस्पतिवार को विचार करेगा। इसी तरह की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की एक अलग पीठ पहले ही नोटिस जारी कर चुकी है।

12 जुलाई को उस पीठ ने केंद्र और अटॉर्नी जनरल को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए और दो हफ्ते का समय दिया था। दो पत्रकार मणिपुर के किशोरचंद्र वांगखेमचा और छत्तीसगढ़ के कन्हैया लाल शुक्ला द्वारा संयुक्त रूप से दायर उस याचिका में कहा गया है कि धारा-124 ए, संविधान के तहत मिले बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

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