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सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय पर लगाया दो लाख रुपये का जुर्माना

Tue, 24 Oct 2017 08:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 24 Oct 2017 08:57 PM IST
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Supreme Court fine two lakh rupees On Environment Ministry
दिल्ली-एनसीआर में पेट कोक और फर्नेंस ऑयल का इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए प्रदूषण उत्सर्जन मानक निर्धारित न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय से कहा कि अदालती निर्देश के तहत आपको 30 जून से पहले मानक तय कर लेना चाहिए था, लेकिन अपने इस निर्देश का पालन नहीं किया।
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पीठ ने मंत्रालय के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, ‘यह बताइए कि आखिर आप तीन-चार महीने क्या कर रहे थे? आप हलफनामा दायर कर कहिए कि आपको प्रदूषण की कोई फिक्र नहीं है।
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औद्योगिक इकाइयां यह कह चुकी हैं कि जो भी मानक तय किए जाएंगे उन्हें स्वीकार होगा। लेकिन मंत्रालय हाथ पर हाथ धरे बैठी हुआ है। हमें नहीं पता कि आखिर क्या हो रहा है।’

मंत्रालय की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि इस संबंध में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन सोमवार को जारी किया जा चुका है और 60 दिनों के भीतर स्टेक होल्डरों को अपनी आपत्तियां जताने के लिए कहा गया है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में 34 तरह की औद्योगिक इकाइयां पेट कोक और फर्रेंस ऑयल का इस्तेमाल करती हैं। कई औद्योगिक श्रेणियों के लिए पहले भी प्रदूषण मानक तय किए गए थे। हालांकि पीठ ने मंत्रालय के प्रयासों पर नाराजगी जताते हुए दो लाख रुपये जुर्माना लगा दिया।

इससे पहले, सुनवाई के दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि दो मई के सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन औद्योगिक इकाइयों के लिए सल्फर डाइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का मानक तय करने के लिए कहा था।


30 जून तक मानक तय होने थे लेकिन अब तक मानक तय नहीं किए गए। पीठ ने बोर्ड से यह इस बारे में जानना चाहा तो उसके वकील ने बताया कि उनकी ओर से जून में ही उत्सर्जन मानक मंत्रालय को सौंप दिया गया था। 
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