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सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी: 11 साल से जेल में बंद आरोपी पर नहीं तय हुआ आरोप, पूछा- आखिर इसमें देरी क्यों हो रही
Tue, 31 Aug 2021 06:58 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 31 Aug 2021 06:58 AM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, आरोपी को या तो दोषी ठहराया जाए या फिर बरी कर दिया जाए
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
वर्ष 1993 में राजधानी एक्सप्रेस और अन्य ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 11 साल से जेल में बंद एक आरोपी के खिलाफ अभी तक आरोप तय न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को या तो दोषी ठहराया जाए या बरी कर दिया जाए। आखिर इसमें देरी क्यों हो रही है।
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तेजी से सुनवाई के अधिकार को रेखांकित करते हुए शीर्ष अदालत ने अजमेर के विशेष टाडा अदालत के न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी है कि आखिर हमीर उई उद्दीन के खिलाफ आरोप तय क्यों नहीं किए गए? जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने विशेष न्यायाधीश को इस आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने की तारीख से दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक आरोप क्यों नहीं तय हुए हैं। पीठ ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को आदेश की एक प्रति सीधे न्यायाधीश को और एक प्रति राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) के माध्यम से भेजने के लिए कहा है।
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पिछले दिनों हुई इस मामले की सुनवाई के दौरान हमीर की ओर से पेश हुए वकील शोएब आलम ने कहा कि याचिकाकर्ता 2010 से हिरासत में है लेकिन आरोप तय नहीं किए गए हैं और ट्रायल शुरू होना बाकी है। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी को बिना मुकदमे के अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत व्यक्ति के अधिकारों का घोर दुरुपयोग है। उन्होंने दलील दी कि विशेष टाडा अदालत को याचिकाकर्ता को जमानत देनी चाहिए थी क्योंकि निकट भविष्य में मुकदमे के खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। हमीर ने अपनी याचिका में 27 मार्च 2019 की टाडा अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज करने को चुनौती दी है।
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पीठ ने कहा, कम से कम ट्रायल तो हो
राजस्थान सरकार के वकील विशाल मेघवाल ने स्वीकार किया कि आरोपी के खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए हैं, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि वह लगभग 15 वर्षों से फरार था। पीठ ने तब पूछा कि जब वह 2010 से हिरासत में है तो आरोप क्यों नहीं तय किए गए? आरोपी स्पीडी ट्रायल का हकदार है। उसे दोषी ठहराएं या बरी कर दें, हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन कम से कम ट्रायल तो कीजिए। बिना मुकदमे के उसे अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। इस पर मेघवाल ने दलील दी कि आरोप तय करने में देरी का मुख्य कारण सह आरोपियों में से एक अब्दुल करीम टुंडा गाजियाबाद जेल में बंद है। पीठ ने कहा कि फिर या तो आप मुकदमे को अलग कर दें या मुकदमे को उसके मामले के साथ जोड़ दें लेकिन कम से कम सुनवाई शुरू करें। आलम ने बताया कि राज्य ने अपने जवाबी हलफनामे में टुंडा मामले का जिक्र नहीं किया है।
कई ट्रेनों में हुए बम धमाकों का है आरोपी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच-छह दिसंबर, 1993 को बॉम्बे-नई दिल्ली, नई दिल्ली-हावड़ा, व हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी ट्रेनों और सूरत-बड़ौदा फ्लाइंग क्वीन एक्सप्रेस और एपी एक्सप्रेस में बम धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में दो यात्रियों की मौत और 22 घायल हो गए थे। इस संबंध में कोटा, वलसाड, कानपुर, इलाहाबाद और मलकज-गिरी में मुकदमे दर्ज किए गए थे। बाद में इन मामलों को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया और जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ और हैदराबाद में टाडा के तहत फिर से मुकदमे दर्ज किए गए थे। जांच में पाया गया कि बम विस्फोट एक ही साजिश का नतीजा था और इसलिए सभी मामलों को एक साथ मिला दिया गया। 25 अगस्त, 1994 को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। नौ आरोपी फरार थे। हमीर को फरार दिखाया गया था। हमीर को 2010 में लखनऊ से गिरफ्तार किया गया।