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Supreme Court: पेड़ों की गणना पर सुप्रीम जोर, कहा- वृक्ष अधिकारी के काम की निगरानी के लिए बने प्राधिकरण

Sat, 30 Nov 2024 04:44 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 30 Nov 2024 04:44 AM IST
सार

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। पीठ ने कहा, वृक्षों की गणना के लिए आदेश देने के अलावा हम प्राधिकरण भी बनाना चाहते हैं, जो सत्यापित करेगा कि वृक्ष अधिकारी ने उचित काम किया है या नहीं। 
 

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Supreme Court environment protection tree census time to count trees
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी में पर्यावरण संरक्षण के मामले में सख्ती का संकेत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों की गणना कराने पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह वृक्ष अधिकारी की ओर से किए जाने वाले कार्यों की निगरानी के लिए एक प्राधिकरण बनाना चाहता है।

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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। पीठ ने कहा, वृक्षों की गणना के लिए आदेश देने के अलावा हम प्राधिकरण भी बनाना चाहते हैं, जो सत्यापित करेगा कि वृक्ष अधिकारी ने उचित काम किया है या नहीं। किसी को आदेश की निगरानी भी करनी होगी। पीठ एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना पेड़ों को काटने से रोकने की मांग की गई थी। जब एक वकील ने कहा कि वन विभाग की वृक्ष हेल्पलाइन पर शिकायतों का कोई जवाब नहीं मिला, तो पीठ ने कहा कि आप उस शिकायत को रिकॉर्ड पर रखें। आवेदन में कहा गया है कि दिल्ली में हर घंटे पांच पेड़ काटे जाते हैं। आवेदन में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी शीर्ष अदालत की मंजूरी के बिना दिल्ली में वनों की कटाई की अनुमति देने से रोकने की मांग की गई है।  
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वकीलों से मांगा सुझाव
शीर्ष अदालत ने मामले में पैरवी करने वाले वकीलों से सुझाव देने को कहा, जिसके आधार पर प्राधिकरण गठित किया जाए। पीठ ने कहा कि इसमें न केवल विशेषज्ञों की जरूरत है, वरन प्रक्रिया में एक संस्था को भी शामिल करना चाहिए। कोर्ट ने कहा, हमारा मानना है कि पर्यावरण के मामलों में कठोर आदेश दिए जाने चाहिए। गौरतलब है कि 1994 अधिनियम में वृक्ष प्राधिकरण की स्थापना, कर्तव्यों व वृक्ष अधिकारी की नियुक्ति से संबंधित प्रावधान हैं।
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मामले से जुड़े वकीलों की सराहना
पीठ ने पर्यावरण संरक्षण व पेड़ों की सुरक्षा से संबंधित मामलों से जुड़े वकीलों की सराहना भी की। कहा कि मामले में पेश होने वाले वकील बहुत सहयोगी रहे हैं। उन्होंने हमेशा निष्पक्ष रुख अपनाया है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि हम आभारी हैं। आप हमारे बेहतर भविष्य के लिए ऐसा कर रहे हैं। मामले को अहम बताते हुए पीठ ने याचिका को 18 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

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