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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के फर्जी दावा याचिकाओं के मामले में चार सप्ताह में आरोप तय करें
Tue, 25 Jan 2022 06:07 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 25 Jan 2022 06:07 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश में वकीलों की ओर से सैकड़ों फर्जी दावा याचिकाएं दायर करने की जांच से संबंधित कई आदेश पारित कर रही है।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
उत्तर प्रदेश में संबंधित अदालत के सामने अधिवक्ताओं की ओर से फर्जी दुर्घटना दावों से संबंधित मामलों की सुनवाई जल्द पूरी हो सके इसके लिए सुप्रीम कोर्ट मंगवार को चार सप्ताह के भीतर आरोप तय करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश एमआर शाह और बीवी नागरत्ना की पीठ ने विशेष जांच दल (एसआईटी) लखनऊ के जांच अधिकारी से कहा है कि जिन मामलों मे आरोपपत्र दाखिल हो चुका है उन्हें छोड़कर बाकी मामलों की जल्द से जल्द जांच पूरी करें और संबंधित अदालत के सामने आरोपपत्र दाखिल करें।
पीठ ने कहा कि एसआईटी के वकील के सारणीबद्ध विवरण में दिखाया गया है कि कितने मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। इस रिपोर्ट से प्रतीत होता है कि पहली प्राथमिकी 2016 की है लेकिन आरोपपत्र पिछले साल अक्तूबर-नवंबर में ही दाखिल किया गया है। अन्य मामलों में जांच प्रगति पर है। पीठ ने कहा, 'हम एसआईटी, लखनऊ के जांच अधिकारी को अन्य मामलों में जल्द से जल्द जांच पूरी करने और उसके तुरंत बाद संबंधित अदालत में आरोपपत्र पेश करने का निर्देश देते हैं।'
इसके साथ ही पीठ ने कहा कि जिन मामलों मे आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, हम संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों को निर्देश देते हैं कि चार सप्ताह के अंदर उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद उनमें आरोप तय किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि सुनवाई जल्द से जल्द पूरी हो। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि केंद्र सरकार एक नया व्यापक सूचना प्रपत्र लेकर आई है जिसमें मोटर दुर्घटना के दावों के संबंध में पूरा विवरण दिया जाना है।
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पीठ ने कहा कि एसआईटी के वकील के सारणीबद्ध विवरण में दिखाया गया है कि कितने मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। इस रिपोर्ट से प्रतीत होता है कि पहली प्राथमिकी 2016 की है लेकिन आरोपपत्र पिछले साल अक्तूबर-नवंबर में ही दाखिल किया गया है। अन्य मामलों में जांच प्रगति पर है। पीठ ने कहा, 'हम एसआईटी, लखनऊ के जांच अधिकारी को अन्य मामलों में जल्द से जल्द जांच पूरी करने और उसके तुरंत बाद संबंधित अदालत में आरोपपत्र पेश करने का निर्देश देते हैं।'
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इसके साथ ही पीठ ने कहा कि जिन मामलों मे आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, हम संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों को निर्देश देते हैं कि चार सप्ताह के अंदर उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद उनमें आरोप तय किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि सुनवाई जल्द से जल्द पूरी हो। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि केंद्र सरकार एक नया व्यापक सूचना प्रपत्र लेकर आई है जिसमें मोटर दुर्घटना के दावों के संबंध में पूरा विवरण दिया जाना है।
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