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Talak-E-Hasan: सुप्रीम कोर्ट का तलाक-ए-हसन की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार 

Mon, 30 May 2022 09:03 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 30 May 2022 09:03 PM IST
सार

याचिकाकर्ता पत्रकार बेनजीर हीना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने तलाक-ए-हसन की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की अपील की।

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Supreme court denies prompt hearing on Talak E Hasan case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तलाक-ए-हसन की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। तलाक-ए-हसन में एक पुरुष तीन महीने के दौरान हर महीने में एक बार तलाक कह कर पत्नी को तलाक दे सकता है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता से रजिस्ट्रार के समक्ष मामले का उल्लेख करने का निर्देश दिया।

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याचिकाकर्ता पत्रकार बेनजीर हीना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने तलाक-ए-हसन की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि महिला को दो नोटिस भेजे गए हैं। आनंद ने दलील दी कि तलाक-ए-हसन को लेकर पहला नोटिस 19 अप्रैल को और आखिरी नोटिस 19 मई को दिया गया था। यह याचिका दो मई को दायर की गई थी। इसमें महिला को दो बार तलाक का नोटिस दिया गया है। महिला का एक बच्चा भी है।
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सर्वोच्च अदालत की पीठ ने आनंद से कहा कि रजिस्ट्रार से अनुरोध करें और यदि वह नहीं मानें तो हमारे पास आएं। मामले की तत्काल सुनवाई के लिए पिछले हफ्ते भी उल्लेख किया गया था लेकिन न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील से इस हफ्ते फिर से इसका उल्लेख करने के लिए कहा था। यानी एक बार फिर यह मामला अगली तारीख के लिए टल गया है।
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शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर तलाक-ए-हसन यानी एकतरफा अतिरिक्त न्यायिक तलाक के अन्य सभी रूपों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से केंद्र सरकार को इस मसले पर दिशा निर्देश जारी करने की भी गुहार लगाई गई है ताकि धर्म आधारित तलाक की समस्या से निपटने के लिए समान आधार पर दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें और सभी के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया निर्धारित की जा सके।

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