फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court declines to entertain a PIL demands reforms in dowry domestic violence laws

SC: 'हम कुछ नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और घरेलू हिंसा कानून में सुधार की मांग वाली याचिका खारिज की

Mon, 27 Jan 2025 03:32 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 27 Jan 2025 03:32 PM IST
सार

याचिका वकील विशाल तिवारी ने दायर की थी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों, वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों की सदस्यता वाली एक समिति बनाने की मांग की गई थी, जो मौजूदा दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों की समीक्षा करे। 

विज्ञापन
Supreme Court declines to entertain a PIL demands reforms in dowry domestic violence laws
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों में सुधार की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसके लिए समाज को बदलना होगा, हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। याचिका में कहा गया था कि मौजूदा दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, ऐसे में इनमें सुधार किए जाने चाहिए। 
विज्ञापन


याचिका में कानूनों की समीक्षा के लिए समिति बनाने की मांग की गई थी
बीते दिनों बंगलूरू में एक इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली थी। इंजीनियर ने अपनी पत्नी पर कानूनी तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था और इंजीनियर ने कानून में कथित खामियों का भी आरोप लगाया था। इंजीनियर की आत्महत्या के बाद समाज में देहज और घरेलू हिंसा कानूनों के गलत इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कानूनों में सुधार की मांग की गई। याचिका वकील विशाल तिवारी ने दायर की थी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों, वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों की सदस्यता वाली एक समिति बनाने की मांग की गई थी, जो मौजूदा दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों की समीक्षा करे। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्रा की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए साफ कहा कि 'समाज को बदलना होगा और अदालत इसमें कुछ नहीं कर सकती।'
विज्ञापन


याचिका में दिए गए थे ये सुझाव
याचिका में ये भी मांग की गई थी कि ऐसा प्रावधान किया जाना चाहिए कि शादी पंजीकृत कराते समय शादी में मिले सामान और उपहारों को भी पंजीकृत कराया जाए। साथ ही साल 2010 में आईपीसी की धारा 498ए को लेकर एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणियां की थीं, उन्हें भी लागू किया जाए। याचिका में कहा गया कि कानूनों में सुधार से मासूम पुरुषों की जान बचाई जा सकती है और इस कानून का जो उद्देश्य है, वो भी पूरा होता रहेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


'कानून अवैध मांगें मनवाने का हथियार बने'
याचिका में कहा गया कि 'दहेज रोकथाम कानून और आईपीसी की धारा 498ए विवाहित महिलाओं की सुरक्षा और उनका उत्पीड़न रोकने के लिए बनाए गए थे, लेकिन हमारे देश में इन कानूनों को अवैध मांगे मनवाने और पुरुषों के परिवार पर दबाव बनाने का हथियार बना लिया गया है। इसके चलते सही मामलों को भी शक की निगाह से देखा जाता है। ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पुरुषों को दहेज के मामलों में फर्जी तरीके से फंसा दिया गया और इसका बेहद दर्दनाक अंत हुआ। इससे हमारी न्याय व्यवस्था और अपराध जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं।' याचिका में कहा गया कि 'यह सिर्फ अतुल सुभाष का मामला नहीं है बल्कि लाखों पुरुष ऐसी वजहों से आत्महत्या कर रहे हैं। दहेज कानून के गलत इस्तेमाल के चलते इन कानूनों का असल मकसद कहीं न कहीं पीछे छूट गया है।'
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed