फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court: Death sentence of the accused of murder And Rape Of Minor Girl was commuted to life imprisonment decision of the High Court was reversed

सुप्रीम कोर्ट: तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोपी की मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील, हाई कोर्ट का फैसला पलटा

Wed, 15 Dec 2021 07:14 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 15 Dec 2021 07:14 PM IST
सार

जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने छत्तीसगढ़ के रहने वाले आरोपी लोचन श्रीवास की याचिका पर यह आदेश दिया।

विज्ञापन
Supreme Court: Death sentence of the accused of murder And Rape Of Minor Girl was commuted to life imprisonment decision of the High Court was reversed
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने छत्तीसगढ़ के रहने वाले आरोपी लोचन श्रीवास की याचिका पर यह आदेश दिया। ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उसे बरकरार रखा था।

विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज ने 17 जून 2016 को आरोपी को दोषी ठहराया था। उसी दिन उसे मौत की सजा सुनाई गई थी। पीठ ने कहा कि दोषी कोई कुख्यात अपराधी नहीं था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि अपीलकर्ता के सुधार और पुनर्वास की कोई संभावना नहीं है। ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने सिर्फ अपराध पर विचार किया। अपराधी, उसकी मानसिक स्थिति, उसकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि इत्यादि पर विचार नहीं किया।
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता युवा है, जो अपराध के वक्त 23 साल का था। वह ग्रामीण पृष्ठभूमि का है। सरकार ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह प्रदर्शित होता हो कि आरोपित के सुधरने या उसके पुनर्वास की कोई संभावना नहीं है। शीर्ष अदालत ने लोचन के छोटे भाई और बड़ी बहन की ओर से दाखिल हलफनामों पर भी संज्ञान लिया जिसमें दावा किया गया है कि स्कूल में उसका प्रदर्शन अच्छा था और परिवार को गरीबी से निकालने के लिए उसने लगातार प्रयास किए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता का जेल में व्यवहार भी ठीक रहा है। उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं है। यह उसका पहला अपराध है। इसमें कोई शक नहीं है कि यह अपराध जघन्य है। शीर्ष अदालत ने आदेश में यह भी कहा कि हमने पाया कि त्वरित सुनवाई वांछनीय है, लेकिन नियुक्ति के बाद आरोपित के वकील को अपना केस तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।


अभियोजन के अनुसार, पीडि़त बच्ची का परिवार और लोचन एक ही बिल्डिंग में रहते थे। 24 फरवरी 2016 को बच्ची लापता हो गई थी और लोचन ने उसे तलाशने का प्रस्ताव किया था। बाद में उसने बताया कि बच्ची सड़क किनारे एक पोल के पास झाड़ियों में एक बोरी में बंधी हुई पड़ी थी। इस पर लोगों को उस पर संदेह हुआ और पुलिस को सूचित कर दिया। पुलिस ने उससे पूछताछ की और जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed