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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court crisis: retired judges write open letter to CJI Dipak Mishra

SC के जजों को मिला पूर्व जजों का साथ, CJI को खुला खत लिखकर आपत्तियों को बताया जायज

Sun, 14 Jan 2018 06:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 14 Jan 2018 06:12 PM IST
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Supreme Court crisis: retired judges write open letter to CJI Dipak Mishra

चीफ जस्टिस के खिलाफ मोर्चा खोलने सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठम जजों को चार पूर्व जजों का समर्थन मिला है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पीबी सावंत, दिल्ली हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए पी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के चन्द्रु और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच सुरेश ने भारत के प्रधान न्यायाधीश को खुला पत्र लिखा है।

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इस पत्र में इन पूर्व जजों ने 4 मौजूदा वरिष्ठ जजों की आपत्तियों को जायज ठहराया है। इन पूर्व जजों ने चीफ जस्टिस से मामलों के आवंटन में पारदर्शी तरीका अपनाने और आवंटन के लिए नियम बनाने का भी सुझाव दिया है। इन जजों ने कहा है कि जब तक नियम नहीं बनता तब तक संवेदनशील मामलों की सुनवाई पांच शीर्ष जजों से ही कराई जानी चाहिए।
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पूर्व जजों ने इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के चार नाराज न्यायाधीशों की ओर से उठाए गए मुद्दे का समर्थन करते हुए कहा है कि बेंच बनाने और सुनवाई के लिए मुकदमों का बंटवारा करने के चीफ जस्टिस के विशेषाधिकार को और ज्यादा पारदर्शी और नियमित करने की जरूरत है। 
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पूर्व जजों का कहना है कि हाल के महीनों में मुख्य न्यायाधीश अहम मुकदमे वरिष्ठ जजों की बेंच को भेजने की बजाय अपने चहेते कनिष्ठ जजों को भेजते रहे हैं।

इसके अलावा पिछले कुछ समय से यह भी देखने को मिला है कि संविधान पीठों में इन चार वरिष्ठ जजों को जगह नहीं दी जा रही है। इन वरिष्ठ जजों की लगातार उपेक्षा की जाती रही  है। पूर्व जजों ने कहा है कि चीफ जस्टिस खुद इस मामले में पहल करें और भविष्य के लिए समुचित और पुख्ता न्यायिक व प्रशासनिक उपाय करें। 

पत्र में इन चार जजों ने कहा है कि यह सही है कि चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं लेकिन उन्हें मनमाने तरीके से मामलों का आवंटन करने की ऑथोरिटी नहीं है।


उनका कहना है कि जब तक मामलों के आवंटन को लेकर कोई नियम नहीं बन जाता तब तक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों की सुनवाई टॉप पांच जजों को ही करनी चाहिए।

गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस कर सीधा मोर्चा खोला था। इन जजों ने सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन पर सवाल उठाए थे और अपनी आपत्तियों से संबंधित पत्र मीडिया में सार्वजनिक कर दिया था।

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