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सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी

Fri, 24 Jul 2020 12:03 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 24 Jul 2020 12:03 PM IST
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Supreme Court contempt petition against lawyer Prashant Bhushan fixed for further hearing on 4 August 
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट में आज वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायालय ने वकील प्रशांत भूषण, तरुण तेजपाल के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले की सुनवाई चार अगस्त तक स्थगित कर दी है। उनका प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने अदालत से समय मांगा था।

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यह अवमानना याचिका तब दायर किया गया था जब उन्होंने भारत के मुख्य न्यायधीश पर भ्रष्टाचार में कथित संलिप्तता का आरोप लगाया था। उच्चतम न्यायालय ने नवंबर, 2009 में प्रशांत भूषण द्वारा एक पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ पूर्व और पीठासीन न्यायाधीशों के बारे में कथित रूप से आक्षेप लगाने के मामले में उन्हें अवमानना का नोटिस दिया था। इसी मामले में आज सुनवाई हुई।

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बता दें कि इससे पहले शीर्ष न्यायालय ने न्यायपालिका के प्रति कथित आपत्तिजनक ट्वीट करने के कारण न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही के लिये कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रशांत भूषण को बुधवार नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने कहा कि उनके बयानों ने पहली नजर में न्याय के प्रशासन का अपयश किया है।

शीर्ष अदालत ने भूषण के हालिया ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि ये बयान पहली नजर में जनता की नजरों में उच्चतम न्यायालय की संस्था और विशेषकर प्रधान न्यायाधीश के पद की गरिमा और सत्ता को कमतर करने वाले हैं। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को भी इसमें सहयोग के लिये नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने अवमानना की कार्यवाही के इस मामले में ट्विटर इंक को भी पक्षकार बनाने और उसे इसमें जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि ‘हमारी, पहली नजर में, यह राय है कि ट्विटर पर ये बयान न्याय के प्रशासन में अपयश लाए हैं और ये सामान्य रूप में उच्चतम न्यायालय की संस्था और विशेष रूप से प्रधान न्यायाधीश के पद की गरिमा और सत्ता को आम जनता की नजरों में कमतर करते हैं।’

पीठ ने आदेश में आगे कहा कि ‘हम इन ट्वीट का स्वत: संज्ञान लेते हैं और स्वत: कार्यवाही दर्ज करते हैं। हम अटॉर्नी जनरल और अधिवक्ता प्रशांत भूषण को भी नोटिस जारी करते हैं।’’

पीठ ने कहा कि ‘प्रशासनिक पक्ष में मामले के परीक्षण के बाद हमने मामले को न्यायालय में उचित आदेश पारित करने के लिये सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। हमने याचिका का अवलोकन किया है।’ पीठ ने मुख्य न्यायाधीश के बारे में किए गए ट्वीट का हवाला दिया था।  सुनवाई के दौरान ट्विटर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवैया ने पीठ से कहा था कि ट्विटर इंडिया को इस मामले में गलती से पक्षकार बनाया गया है और इसकी जगह ट्विटर इंक होना चाहिए था।

पीठ ने इस मामले में सही पक्षकार ट्विटर इंडिया नहीं बल्कि ट्विटर इंक के होने संबंधी तथ्य का संज्ञान लेते हुए कंपनी को इस बारे में उचित आवेदन दायर करने की अनुमति दे दी थी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पूवैया का कहना है कि ट्विटर इंक, कैलिफोर्निया, अमेरिका सही वर्णन है जिस पर प्रशांत भूषण ने ट्वीट किए थे। पीठ ने कहा कि इन्हें जवाब दाखिल करने दीजिए। साथ ही पीठ ने इस मामले को पांच अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया था।


प्रशांत भूषण लगातार न्यायपालिका से जुड़े मसले उठाते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से पलायन कर रहे कामगारों के मामले में शीर्ष अदालत के रवैये की तीखी आलोचना की थी। भूषण ने भीमा-कोरेगांव मामले में आरोपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज जैसे जेल में बंद नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बयान भी दिए थे।
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