Supreme Court: अनुकंपा नियुक्ति केस में अदालत ने कहा- कल्याणकारी उपाय नियम की निष्पक्ष तार्किक व्याख्या जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय है, जिसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल सहायता प्रदान करना है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसी योजनाओं की व्याख्या निष्पक्ष और तार्किक तरीके से की जानी चाहिए, ताकि उद्देश्य पूरे हों। पीठ ने इस टिप्पणी के साथ एक व्यक्ति की याचिका को मंजूरी दे दी। याचिकाकर्ता के पिता, जो वेस्टर्न कोलफील्ड्स लि. में डोजर ऑपरेटर थे, की 17 दिसंबर 2020 को सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। पिता की मौत के समय बेटे की उम्र 34 वर्ष, 10 महीने और 12 दिन थी। बेटे का अनुकंपा नियुक्ति का दावा इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि तब तक नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट-6 के खंड 9.3.4 के तहत निर्धारित 35 वर्ष की आयु सीमा पार हो चुकी थी।
कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई
कर्नाटक से कावेरी का पानी तत्काल छोड़ने के निर्देश देने की मांग वाली तमिलनाडु सरकार और अन्य याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होगी। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष तय की गई है। वरिष्ठ वकील पी. विल्सन ने किसानों की ओर से एक अलग याचिका पर तत्काल सुनवाई का उल्लेख किया था। सीजेआई ने बताया कि यह मामला पहले न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष आना था, लेकिन उनके अस्वस्थ होने के कारण तारीख में बदलाव किया गया है।
एसिड अटैक पीड़ितों को रेलवे किराये में मिलेगी रियायत
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को इलाज के लिए ट्रेन से यात्रा करने पर किराये में रियायत देने की नीति बनाने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। सरकार उन्हें अलग दिव्यांग श्रेणी में रखने के बजाय ‘पेशेंट कैटेगरी’ के तहत यह सुविधा देने पर विचार कर रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र से इस मामले में प्रस्तावित नीति का ड्राफ्ट छह सप्ताह के भीतर दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने केंद्र से रियायत देने के मामले पर उदारता से विचार करने और राहत को समयबद्ध तरीके से लागू करने को कहा। याचिकाकर्ता संस्था ने कहा कि महंगे एसी टिकटों का खर्च उठाना पीड़ितों के लिए मुश्किल होता है। साथ ही, मौजूदा नियमों के कारण उन्हें दिव्यांगों के लिए उपलब्ध रेलवे रियायत का लाभ भी आसानी से नहीं मिल पाता।कोर्ट ने केंद्र से एसिड अटैक पीड़ितों को थैलेसीमिया और कैंसर मरीजों की तरह ‘पेशेंट कैटेगरी’ में शामिल करने की संभावना पर भी विचार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक और बायोमेट्रिक निगरानी के इस्तेमाल से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यह याचिका राज्यसभा सांसद एए रहीम ने दाखिल की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को इसी मुद्दे से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि दो प्रमुख चिंताएं हैं प्रदर्शनकारियों के चेहरों की पहचान करना और निजी कंपनियों द्वारा उनका डेटा स्टोर किया जाना।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल लोगों की तस्वीरें और वीडियो सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और मोबाइल कमांड सेंटर के जरिए इकट्ठा किए। इसके बाद कथित तौर पर बायोमेट्रिक डेटा को राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से जोड़ा गया। याचिका के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल से पहले कोई प्राइवेसी इम्पैक्ट असेसमेंट भी नहीं किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि संसद की ओर से स्पष्ट कानून बनने तक ऐसी व्यापक बायोमेट्रिक निगरानी पर रोक लगनी चाहिए।