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सुप्रीम कोर्ट: 'दहेज के सामान्य आरोप व्यक्ति के रिश्तेदारों पर गहरे दाग छोड़ते हैं, यह चिंताजनक, इसका विरोध होना चाहिए'

Tue, 08 Feb 2022 10:32 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 08 Feb 2022 10:32 PM IST
सार

जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी ने पीठ ने अपने एक फैसले में कहा, "सामान्य और सर्वव्यापी आरोपों पर ऐसी स्थिति नही आनी चाहिए जहां शिकायतकर्ता के पति के रिश्तेदारों को मुकदमे से गुजरना पड़े।"

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Supreme Court comments on Matrimonial litigation up greater disaffection surrounding institution of marriage now news and updates
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पत्नी द्वारा दहेज उत्पीड़न के सामान्य और सर्वव्यापी आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों को मुकदमे से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि इससे आरोपी पर एक गंभीर 'दाग' लग सकता है और इसका विरोध किया जाना चाहिए। 
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जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी ने पीठ ने अपने एक फैसले में कहा, "सामान्य और सर्वव्यापी आरोपों पर ऐसी स्थिति नही आनी चाहिए जहां शिकायतकर्ता के पति के रिश्तेदारों को मुकदमे से गुजरना पड़े। एक आपराधिक मुकदमा जिसमें आरोपी अंततः बरी हो जाते है, आरोपी पर गंभीर निशान छोड़ जाते हैं। इस तरह की प्रैक्टिस को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।"
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किस मामले पर चल रही थी सुनवाई?
बिहार के पूर्णिया के मोहम्मद इकराम के परिवार के सदस्यों द्वारा पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की। दहेज के तौर पर कार की मांग और गर्भावस्था को समाप्त करने की धमकी के आरोपों पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि एक अप्रैल, 2019 की प्राथमिकी में पता चलता है कि सभी आरोपियों पर सामान्य तरह के आरोप थे। मसलन, मानसिक रूप से परेशान करना और  गर्भावस्था को समाप्त करने की धमकी देना आदि। इसलिए आरोप सामान्य और सर्वव्यापक हैं और कहा जा सकता है कि यह छोटी-छोटी झड़पों के कारण लगाया गया है।


पति के रिश्तेदारों को विवादों में फंसाने की प्रवृत्ति चिंताजनक
पीठ ने यह भी बताया कि इस अदालत ने कई मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा-498 ए के दुरुपयोग और पति के रिश्तेदारों को वैवाहिक विवादों में फंसाने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। पीठ ने कहा, "वैवाहिक विवाद के दौरान लगाए गए सामान्य सर्वव्यापी आरोपों को यदि अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए इस अदालत ने अपने निर्णयों के माध्यम से अदालतों को चेताया है कि पति के रिश्तेदारों और ससुरालियों को मुकदमे में तब तक नहीं ढकेलना चाहिए जब तक उनके खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता हो।"
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