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चिंता: सीजेआई बोले- देश में अब भी गुलामी के दौर की न्यायिक व्यवस्था, कही यह बड़ी बात
Sat, 18 Sep 2021 11:13 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 18 Sep 2021 11:13 PM IST
सार
र्नाटक स्टेट बार काउंसिल के न्यायाधीश एमएम शांतनगौदर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सीजेआई ने कानून प्रणाली का भारतीयकरण करने की बात पर बल देते हुए कहा कि भारत की समस्याओं पर अदालतों की वर्तमान कार्यशैली फिट नहीं बैठती है।
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सीजेआई एनवी रमन्ना
- फोटो : ANI
विस्तार
देश की न्यायिक व्यवस्था पर मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने चिंता जाहिर की है। कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल के न्यायाधीश एमएम शांतनगौदर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सीजेआई ने कहा कि देश में अब भी गुलामी के दौर की न्याय व्यवस्था कायम है। शायद देश की जनता के लिए यह ठीक नहीं है। उन्होंने कानून प्रणाली का भारतीयकरण करने की बात पर बल देते हुए कहा कि भारत की समस्याओं पर अदालतों की वर्तमान कार्यशैली फिट नहीं बैठती है।
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों के लोग अंग्रेजी में होने वाली कानूनी कार्यवाही को नहीं समझ पाते हैं। इसलिए उन्हें ज्यादा पैसे बर्बाद करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी को कोर्ट और जज से डर नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी न्याय व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण स्थान मुकदमा दायर करने वाले व्यक्ति का होता है। कोर्ट की कार्यवाही पारदर्शी और जवाबदेही भरी होनी चाहिए। जजों और वकीलों का कर्तव्य है कि वे ऐसा माहौल तैयार करें जो आरामदायक हो।
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जस्टिस रमना ने जस्टिस शांतनगौदर को याद किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस शांतनगौदर आम लोगों की जरूरतों को समझते थे। उन्होंने जस्टिस शांतनगौदर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जस्टिस शांतनगौदर का देश की न्यायपालिका में अहम योगदान है। देश ने आम आदमी के हित का ध्यान रखने वाला जज खो दिया। वह प्रैक्टिस करते समय गरीबों और वंचितों के मामलों को उठाने में रुचि दिखाते थे।
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