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Supreme Court: मुकदमों का बोझ कम करने की कोशिश, सुप्रीम कोर्ट की सात पीठ लोक अदालत के मामलों पर करेंगी सुनवाई

Mon, 29 Jul 2024 02:45 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 29 Jul 2024 02:45 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को दिन की कार्यवाही की शुरुआत में कहा कि 'आज से शुक्रवार तक सुप्रीम कोर्ट की लोक अदालत होगी और उसमें सात पीठ बैठेंगी।'

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supreme court cji dy chandrachud said seven benches hear lok adalat matters till next week
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : PTI

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सात पीठ आज से शुक्रवार दोपहर 2 बजे एक विशेष लोक अदालत में सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई करेंगी। उन्होंने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने के उद्देश्य शीर्ष अदालत 3 अगस्त तक विशेष लोक अदालत आयोजित कर रही है।
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मुख्य न्यायाधीश ने कही ये बात
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को दिन की कार्यवाही की शुरुआत में कहा कि 'आज से शुक्रवार तक सुप्रीम कोर्ट की लोक अदालत होगी और उसमें सात पीठ बैठेंगी। अगर वकीलों के पास ऐसे मामले हैं जो लोक अदालत में जा सकते हैं, तो कृपया उन्हें लोक अदालत में लेकर आएं।' सीजेआई ने नागरिकों से आग्रह किया था कि वे अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण और तेजी से हल करने के लिए विशेष लोक अदालत में भाग लें।
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सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक वीडियो संदेश में, सीजेआई ने कहा, '29 जुलाई से 3 अगस्त 2024 तक, सर्वोच्च न्यायालय एक विशेष लोक अदालत का आयोजन कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में इन लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है।' वीडियो में कहा गया कि लंबित मामलों की संख्या को लेकर मुख्य न्यायाधीश चिंतित हैं।' 
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'लोक अदालतें देश की न्यायिक प्रणाली का अभिन्न अंग'
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 'अपने सभी सहयोगियों और सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों की ओर से, मैं उन सभी नागरिकों से अपील करता हूं, जिनके पास सुप्रीम कोर्ट में मामले हैं, या वकील, अधिवक्ता, रिकॉर्ड पर हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाएं और मामलों को तेजी से हल करने का प्रयास करें, जो हर प्रतियोगी पक्ष को स्वीकार्य हो।


उन्होंने कहा कि 'लोक अदालतें देश की न्यायिक प्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं, जो सौहार्दपूर्ण समझौतों को बढ़ावा देने और तेजी लाने के साधन के रूप में वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ाती हैं। वैवाहिक विवाद, संपत्ति विवाद, मोटर दुर्घटना दावे, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, सेवा और श्रम से संबंधित मामले जो शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित हैं, उन्हें शीघ्र निपटान की सुविधा के लिए लिया जाएगा।
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