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सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार को समाज के खिलाफ अपराध करार दिया, गुजरात हाईकोर्ट का फैसला पलटा

Tue, 02 Feb 2021 11:07 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 02 Feb 2021 11:07 PM IST
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Supreme Court calls corruption a crime against society, Gujarat High Court reverses verdict
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार को ‘समाज के खिलाफ अपराध’ करार दिया है। शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को दरकिनार कर दिया, जिसमें उसने एक आरोपी को भ्रष्टाचार के मामले में बरी कर दिया था। 

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को बरी करते समय रिकॉर्ड में दर्ज सबूतों पर विस्तारपूर्वक गौर नहीं किया गया। मामला उच्च न्यायालय में इसके लिए वापस भेजे जाने के योग्य है, ताकि वह इस पर कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करे।
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न्यायमूर्ति अशोक भूषण के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को यह ध्यान में रखना चाहिए था कि वह भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत अपराधों से निपट रहा है जो समाज के खिलाफ अपराध है। इसलिए, उच्च न्यायालय को अधिक सावधान रहना चाहिए और विस्तार से गौर करना चाहिए था। उच्च न्यायालय ने अपील का जिस तरह से निपटारा किया उससे हम सहमत नहीं हैं।
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शीर्ष कोर्ट ने कि आरोपी को अधिनियम के तहत अपराध के लिए बरी करने के उच्च न्यायालय के 12 जनवरी, 2015 के फैसले और आदेश को खारिज किया जाता है। पीठ में न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह शामिल थे। पीठ ने यह फैसला उच्च न्यायालय के जनवरी 2015 के फैसले के खिलाफ गुजरात राज्य द्वारा दायर अपील पर सुनाया।


उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करते हुए आरोपी को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराध से बरी किया था। निचली अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत अपराध का दोषी ठहराया था, जो आईटीआई गांधी नगर में सहायक निदेशक के तौर पर काम करता है। अदालत ने उस पर 10,000 रुपये का जुर्माने के साथ उसे पांच साल के कारावास की सजा सुनाई थी। 

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