{"_id":"5bbd975d867a55281f42fbda","slug":"supreme-court-asks-to-central-government-on-rafale-deal-report-sought-in-sealed-envelope","type":"story","status":"publish","title_hn":"राफेल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- 'कैसे किया सौदा, सीलबंद लिफाफे में सौंपें रिपोर्ट'","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
राफेल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- 'कैसे किया सौदा, सीलबंद लिफाफे में सौंपें रिपोर्ट'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:38 AM IST
विज्ञापन
राफेल विमान (सांकेतिक चित्र)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल सौदे के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दायर की गई याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से राफेल पर फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में सौंपने को कहा है। इसके लिए अदालत ने केंद्र को 29 अक्टूबर तक का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट किया कि उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए। अदालत ने सिर्फ सौदे की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को ध्यान में नहीं रख रहा है।
इस बीच केंद्र ने भी राफेल पर दाखिल जनहित याचिकाओं का विरोध किया और यह कहते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए ये याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
विज्ञापन
बता दें कि अधिवक्ता विनीत धांडा, कांग्रेस नेता और आरटीआई कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और अन्य की ओर से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसपर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने सुनवाई की।
इन याचिकाओं के जरिए राफेल सौदे पर रोक लगाने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपनी अर्जी में फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान सौदे में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए उसपर रोक लगाने की मांग की थी।
बता दें कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश कर रही हैं। इस मामले पर पीएम द्वारा साधी गई चुप्पी पर राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि पीएम मोदी ने फ्रांस की सरकार से 36 लड़ाकू विमान खरीदने का जो सौदा किया है उसका मूल्य यूपीए कार्यकाल में किए गए सौदे की तुलना में अधिक है। जिसकी वजह से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पार्टी का दावा है कि पीएम मोदी ने इस सौदे को बदलवाया और ठेका एचएएल से लेकर रिलायंस डिफेंस को दे दिया।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट किया कि उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए। अदालत ने सिर्फ सौदे की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को ध्यान में नहीं रख रहा है।
विज्ञापन
इस बीच केंद्र ने भी राफेल पर दाखिल जनहित याचिकाओं का विरोध किया और यह कहते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए ये याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
विज्ञापन
बता दें कि अधिवक्ता विनीत धांडा, कांग्रेस नेता और आरटीआई कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और अन्य की ओर से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसपर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने सुनवाई की।
इन याचिकाओं के जरिए राफेल सौदे पर रोक लगाने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपनी अर्जी में फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान सौदे में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए उसपर रोक लगाने की मांग की थी।
बता दें कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश कर रही हैं। इस मामले पर पीएम द्वारा साधी गई चुप्पी पर राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि पीएम मोदी ने फ्रांस की सरकार से 36 लड़ाकू विमान खरीदने का जो सौदा किया है उसका मूल्य यूपीए कार्यकाल में किए गए सौदे की तुलना में अधिक है। जिसकी वजह से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पार्टी का दावा है कि पीएम मोदी ने इस सौदे को बदलवाया और ठेका एचएएल से लेकर रिलायंस डिफेंस को दे दिया।