{"_id":"65661ab1bef1eadb050681fa","slug":"supreme-court-asks-questions-from-center-on-proposal-to-extend-tenure-of-delhi-cs-2023-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: 'क्या आपके पास कोई और अधिकारी नहीं', दिल्ली के मुख्य सचिव का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव पर केंद्र से सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: 'क्या आपके पास कोई और अधिकारी नहीं', दिल्ली के मुख्य सचिव का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव पर केंद्र से सवाल
Tue, 28 Nov 2023 10:22 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 28 Nov 2023 10:22 PM IST
सार
सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया था कि सरकार मौजूदा अधिकारी का कार्यकाल को सीमित अवधि के लिए बढ़ाने का इरादा रखती है। वह फिलहाल डेढ़ वर्ष से अधिक समय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहे तो सेवानिवृत्त व्यक्ति का कार्यकाल भी बढ़ाया जा सकता है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली के मुख्य सचिव का कार्यकाल बढ़ाने वाले केंद्र के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़ा किया है। कोर्ट ने पूछा कि क्या आपके पास कोई अन्य आईएएस अधिकारी नहीं है। शीर्ष अदालत ने यह भी जानना चाहा कि वह (केंद्र) किस शक्ति के तहत ऐसा कर सकता है। साथ ही चुटकी ली कि क्या वह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ ही अटका हुआ है। इस पद के लिए कोई अन्य आईएएस अधिकारी नहीं था।
विज्ञापन
सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ को केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया था कि सरकार मौजूदा अधिकारी का कार्यकाल को सीमित अवधि के लिए बढ़ाने का इरादा रखती है। वह फिलहाल डेढ़ वर्ष से अधिक समय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहे तो सेवानिवृत्त व्यक्ति का कार्यकाल भी बढ़ाया जा सकता है।
विज्ञापन
इस पर सीजेआई ने कहा, क्या आपके पास सिर्फ एक ही व्यक्ति है जिस पर आप अटके हैं? आप नियुक्ति करना चाहते हैं, करें। क्या आपके पास कोई आईएएस अधिकारी नहीं है जिसे दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया जा सके? इस पर मेहता ने कहा, हम एक व्यक्ति पर ही नहीं अटके हैं, कुछ प्रशासनिक कारण हैं। इस पर पीठ ने केंद्र से बुधवार तक यह बताने को कहा कि किस आधार पर वह मुख्य सचिव नरेश कुमार का कार्यकाल छह महीने बढ़ाना चाहती है।
विज्ञापन
कुमार 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे है। पीठ ने सुझाव दिया कि कुमार को सेवानिवृत्त किया जाए और उनकी जगह नई नियुक्ति की जानी चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र के पास नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम के तहत शक्ति है और इस पर कोई रोक नहीं है। दिल्ली सरकार के वकील मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि इस मुख्य सचिव और प्रशासन के बीच संचार, भरोसे और विश्वास का पूर्ण उल्लंघन हुआ था। उन्होंने कहा, हम अपनी पसंद के व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन केंद्र सबसे वरिष्ठ पांच आईएएस अधिकारियों में से चुन सकता है या एलजी और सीएम को एक साथ बैठकर निर्णय लेने दे सकता है।
पीठ बिना किसी परामर्श के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति या मौजूदा शीर्ष नौकरशाह नरेश कुमार का कार्यकाल बढ़ाने के केंद्र के किसी भी कदम के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दिल्ली सरकार ने सवाल उठाया है कि केंद्र बिना किसी परामर्श के नियुक्ति कैसे आगे बढ़ा सकता है जबकि नया कानून चुनौती में है।
मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा गृह मंत्रालय करता है
इससे पहले पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा से केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है। सिंघवी ने कहा, मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती है। इस पर मेहता ने कहा, कभी नहीं, मैं इसे हलफनामे में भी लिखित दे सकता हूं। इस पर सीजेआई ने कहा, हमारे पास एक ऐसा तरीका होना चाहिए जिसके तहत सरकार काम करे। मुझे यकीन है कि आप दोनों हमें कोई रास्ता दे सकते हैं।
दिल्ली सरकार ने याचिका में लगाए ये आरोप
याचिका में आरोप है कि संशोधन अधिनियम 2023 संविधान पीठ के फैसले का उल्लंघन है। आप ने दलील दी, यह दिल्ली सरकार को मुख्य सचिव की नियुक्ति में केवल पर्यवेक्षक बनाता है। प्रभावी और सुचारु शासन के लिए, यह राज्य सरकार है, जो मुख्य सचिव की नियुक्ति करती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम, 1954 के नियम 7(2) में साफ है, राज्य कैडर में नियुक्तियां राज्य सरकार करती है। इस व्यवस्था के पीछे के तर्क को इस अदालत ने बार-बार बरकरार रखा है।