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Safety of Medical Professionals: स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने NTF से मांगा जवाब

Tue, 05 Aug 2025 03:11 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 05 Aug 2025 03:11 PM IST
सार

आरजी कर केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर बनी एनटीएफ से आठ हफ्तों के भीतर जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट का कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि भविष्य में ऐसे अपराध न दोहराए जाएं, और डॉक्टर बिना डर के काम कर सकें।

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Supreme Court asks NTF to file its stand on reports over safety of medical professionals
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर बनी नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) को निर्देश दिया कि वह राज्यों और अन्य पक्षकारों की तरफ से दी गई रिपोर्टों पर अपना पक्ष आठ हफ्तों के भीतर अदालत में पेश करे। यह मामला उस डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है, जो पिछले साल कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई थी। इस जघन्य अपराध के बाद देशभर में डॉक्टरों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला था।
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सुप्रीम कोर्ट ने किया टास्क फोर्स का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए 20 अगस्त 2024 को नेशनल टास्क फोर्स गठित की थी। इसका मकसद था कि अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए एक ठोस प्रोटोकॉल बनाया जाए।
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सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
मंगलवार को जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश दिया कि नेशनल टास्क फोर्स सभी रिपोर्टों पर विचार कर आठ हफ्ते में जवाब दाखिल करे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश के कई अस्पतालों, खासकर एम्स दिल्ली को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की गैर-हाजिरी को नियमित किया जाए। कुछ अस्पतालों ने डॉक्टरों की अनुपस्थिति को नियमित कर दिया, लेकिन एम्स जैसे कुछ संस्थानों ने इसे अनुपस्थिति की छुट्टी माना।


सुप्रीम कोर्ट की डॉक्टरों से अपील
22 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील करते हुए कहा था कि 'न्याय और चिकित्सा दोनों को रोका नहीं जा सकता।' कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि डॉक्टरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, अगर वे काम पर लौटते हैं।

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यह मामला उस महिला पीजी डॉक्टर की हत्या और दुष्कर्म से जुड़ा है, जिसका शव 9 अगस्त 2024 को अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिली थी। अगले दिन पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। 20 जनवरी 2025 को कोलकाता की एक ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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