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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court agrees to hear the plea of Cyrus Mistry seeking to expunge remarks made against him by the top court in a judgment

Tata VS Cyrus Mistry: साइरस मिस्त्री की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार, तल्ख टिप्पणियों को हटाने की मांग

Mon, 28 Feb 2022 11:37 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 28 Feb 2022 11:37 AM IST
सार

साइरस मिस्त्री की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि याचिका पर 10 दिनों के बाद सुनवाई होगी।

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Supreme Court agrees to hear the plea of Cyrus Mistry seeking to expunge remarks made against him by the top court in a judgment
साइरस मिस्त्री - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने साइरस मिस्त्री की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त कर दी है। इस याचिका में मिस्त्री ने टाटा समूह के अपने अध्यक्ष के रूप में उन्हें हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए उनके खिलाफ की गई टिप्पणी को हटाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब मामले को 10 दिनों के बाद सुनवाई के लिए पोस्ट किया है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ को सीआईपीएल और मिस्त्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने कहा कि यह याचिका मिस्त्री के खिलाफ कुछ तल्ख टिप्पणियों को हटाने के लिए दायर की गई है । जो कि मिस्त्री के प्रतिष्ठा, अखंडता और चरित्र को प्रभावित करती है।

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अक्तूबर 2016 में मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाया गया
मिस्त्री को 24 अक्तूबर 2016 को टाटा संस के चेयरमैन पद से अचानक बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया था। हालांकि, बाद में कुछ प्रेस बयानों में समूह ने दावा किया कि मिस्त्री अपेक्षा के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे और उनकी निगरानी में टाटा संस को नुकसान हुआ। दूसरी ओर मिस्त्री के अनुसार घाटे के आंकड़ों में समूह की भारी लाभ कमाने वाली कंपनी टीसीएस से मिलने वाले लाभांश को शामिल नहीं किया गया, जो औसतन सालाना 85 फीसदी से अधिक था। 
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इससे पहले 21 फरवरी को भी हुई थी सुनवाई
बता दें कि 21 फरवरी को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से मिस्त्री समूह द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर नौ मार्च को खुली अदालत में विचार करने पर सहमति व्यक्त की है। जस्टिस रामसुब्रमण्यम ने पुनर्विचार याचिका पर विचार करने के 15 फरवरी के इस आदेश से असहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार पुनर्विचार याचिकाओं पर जजों के चैंबर के भीतर विचार किया जाता है।

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