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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट को दी सलाह, कहा- जजों के खिलाफ कार्रवाई में अति उत्साह से बचें

Mon, 08 Aug 2022 10:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 08 Aug 2022 10:31 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने पटना हाई कोर्ट को सलाह देते हुए कहा कि जब तक भ्रष्टाचार का आरोप नहीं हो, न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अति उत्साह नहीं दिखाना चाहिए। इससे अपने कर्तव्यों का कुशलता से पालन करने वाले न्यायाधीशों में बुरा संदेश जाएगा।
 

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Supreme Court advises Patna High Court Drop disciplinary proceedings against judicial officer
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पटना हाई कोर्ट से कहा कि वह बिहार के एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को खत्म कर दें। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने सलाह देते हुए कहा कि जब तक भ्रष्टाचार का आरोप नहीं हो, न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अति उत्साह नहीं दिखाना चाहिए। इससे अपने कर्तव्यों का कुशलता से पालन करने वाले न्यायाधीशों में बुरा संदेश जाएगा।

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इस टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने पटना हाईकोर्ट से बिहार के निलंबित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को खत्म करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस आर भट की पीठ अररिया में एक अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश (एडीजे) शशि कांत राय द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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पीठ ने उच्च न्यायालय की ओर से पेश वकील गौरव अग्रवाल से कहा, "हमारी ईमानदारी से सलाह है कि सब कुछ खत्म कर दें।" पीठ ने कहा, "यदि आप ड्रॉप नहीं करना चाहते हैं, तो हम इसकी गहराई से जांच करेंगे।' राय ने अपनी याचिका में कहा है कि वह मानते हैं कि उनके खिलाफ "संस्थागत पूर्वाग्रह" है क्योंकि उन्होंने एक ही दिन में छह साल की बच्ची के बलात्कार से जुड़े पॉक्सो मामले में मुकदमे का समापन किया था और दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जब भ्रष्टाचार और दुर्भावना के आरोप हैं, तब ही अनुशासनात्मक कार्रवाई उचित है। पीठ ने यह भी कहा कि न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अति उत्साह नहीं दिखाना चाहिए क्योंकि इससे अन्य न्यायिक अधिकारियों में बुरा संदेश जाएगा जो अपने कर्तव्यों का कुशलता से पालन कर रहे हैं।


पीठ ने न्यायाधीश को 10 दिनों के भीतर बचाव में अपना लिखित बयान देने की अनुमति दी क्योंकि उन्हें 5 अगस्त, 2022 का ज्ञापन मिला था जिसमें आरोप के आलेख थे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की है। हाईकोर्ट के वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता की लिखित प्रकिक्रिया सहित पूरे मामले पर विचार करने के बाद उचित निर्णय दो दिनों के भीतर लिया जाएगा।

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