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Study: धरती का तापमान तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ा तो पैदा होगी गंभीर स्थिति, हिमालय पर हो सकता है सूखे का खतरा
Sun, 03 Mar 2024 07:18 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 03 Mar 2024 07:18 AM IST
सार
क्लाइमेटिक चेंज नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि इस वजह से आसपास के इलाकों को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। प्राकृतिक आपदा के लिहाज से यह स्थिति अकल्पनीय होगी।
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जलवायु परिवर्तन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन के कारण यदि धरती का तापमान तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ा तो हिमालयी इलाकों के लगभग 90 फीसदी हिस्से सालभर सूखे का सामना करेंगे। यह चेतावनी ब्रिटेन में ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय (यूईए) के शोधकर्ताओं की टीम ने अध्ययन के आधार पर दी है। इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और सामाजिक आर्थिक परिदृश्यों को लेकर छह देशों में भविष्य में होने वाले खतरों का मूल्यांकन किया गया है। इसमें भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया और घाना शामिल हैं।
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क्लाइमेटिक चेंज नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि इस वजह से आसपास के इलाकों को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। प्राकृतिक आपदा के लिहाज से यह स्थिति अकल्पनीय होगी।
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जहां से लौटना मुश्किल नहीं
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर दुनिया कई विनाशकारी बिंदुओं से गुजर सकती है, जहां से वापसी संभव नहीं है। बर्फ की चादरों के तेजी से पिघलने से लेकर अमेजन वर्षावनों तक को भीषण सूखे का सामना करना पड़ सकता है। लोग दाने-दाने को मोहताज हो सकते हैं और कई मवेशियों, जीव जंतुओं और जानवरों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
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परागण प्रक्रिया पर भी असर, चलेगी भीषण लू
अध्ययन के मुताबिक, भारत में तीन से चार डिग्री ग्लोबल वार्मिंग पर परागण प्रक्रिया आधे से कम हो जाएगी, जबकि 1.5 डिग्री पर एक चौथाई रह जाएगी। सदी के अंत तक जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में भीषण लू और गर्मी के तनाव में भारी वृद्धि होने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा सूखा, बाढ़, फसल की पैदावार में गिरावट, जैव विविधता और प्रकृति के विनाश के खतरे बढ़ते तापमान के हर अतिरिक्त डिग्री के साथ बढ़ते जाएंगे।
तो संभल सकते हैं हालात
दुनियाभर में बढ़ते तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने से भारत में खेती की जमीन पर सूखे का खतरा 31 और इथियोपिया में 61 फीसदी के बीच घट जाएगा। बाढ़ के कारण होने वाली आर्थिक क्षति भी कम हो जाएगी। शोधकर्ताओं के अनुसार, बढ़ते तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित कर दिया जाए तो देश के 50 फीसदी हिस्सों को जैव विविधता के लिए आश्रय के रूप में कार्य करने में मदद मिल सकती है।
भारी प्राकृतिक पूंजी खतरे में
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, छह देशों में कई इलाकों की पहले से ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के कारण भारी प्राकृतिक पूंजी खतरे में हैं। जब बढ़ती मानव आबादी के प्रभावों को ध्यान में रखा जाता है तब यह खतरा और भी बड़ा हो जाता है। शोध के निष्कर्ष कहते हैं कि जलवायु के अनुकूल जैव विविधता संरक्षण प्रदान करने के लिए संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क का विस्तार आवश्यक है।