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अध्ययन: बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण 9 साल घट सकती है 40 फीसदी भारतीयों की उम्र

Thu, 02 Sep 2021 10:28 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Thu, 02 Sep 2021 10:28 AM IST
सार

  • भारत में समय के साथ भौगोलिक रूप से वायु प्रदूषण का बढ़ रहा है उच्च स्तर
  • मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में वायु गुणवत्ता काफी तेजी से हुई खराब 
  • ईपीआईसी की रिपोर्ट में भारत के एनसीएपी कार्यक्रम की सराहना, 1.7 वर्ष बढ़ जाएगी जीवन प्रत्याशा 
  • सरकारें वायु प्रदूषण के प्रति हुई गंभीर, हर मोर्चे पर बना रही हैं ठोस नीतियां 
     

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Study: 40 percent of Indians age may decrease by 9 years due to rising air pollution in India
air pollution - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण की स्थिति विकराल होती जा रही है। इसका असर भारतीयों की उम्र पर भी पड़ रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ईपीआईसी) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वायु प्रदूषण की वजह से 40 फीसदी भारतीयों की जीवन प्रत्याशा 9 साल से ज्यादा कम हो सकती है।

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48 करोड़ से ज्यादा लोग मध्य, पूर्वी और उत्तर भारत में झेल रहे हैं वायु प्रदूषण का उच्च स्तर
वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) के मुताबिक भारत में समय के साथ भौगोलिक रूप से वायु प्रदूषण का उच्च स्तर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में वायु गुणवत्ता काफी तेजी से खराब हुई है। मध्य, पूर्वी और उत्तर भारत के क्षेत्रों में रहने वाले 48 करोड़ से ज्यादा लोग वायु प्रदूषण के जिस उच्च स्तर का सामना कर रहे हैं, वैसा कोई अन्य देश नहीं कर रहा है। 
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रिपोर्ट में भारत के एनसीएपी कार्यक्रम की सराहना, 1.7 वर्ष बढ़ जाएगी जीवन प्रत्याशा 
रिपोर्ट में खतरनाक प्रदूषण स्तर पर लगाम लगाने के लिए 2019 में शुरू किए गए भारत की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) की सराहना करते हुए कहा गया है कि इसके लक्ष्य को पाने और बनाए रखने से देश की समग्र जीवन प्रत्याशा 1.7 वर्ष और नई दिल्ली की 3.1 वर्ष बढ़ जाएगी।
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एनसीएपी का उद्देश्य औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों के प्रदूषण में कटौती सुनिश्चित कर परिवहन एवं बायोमास जलाने के लिए नियमों को कड़ा बनाना है। साथ ही धूल प्रदूषण को 2024 तक 102 सबसे अधिक प्रभावित शहरों में प्रदूषण को 20 से 30 फीसदी तक कम करना है।

जब दिल्ली वालों ने ली स्वच्छ हवा में सांस 
बढ़ते प्रदूषण का स्तर जानने के लिए आईक्यूएयर ने 2020 में विश्व वायु गुणवत्ता की रिपोर्ट जारी की है। इसमें दिल्ली दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में शामिल है। हालांकि पिछले साल महामारी के कारण लॉकडाउन और अन्य प्रतिबंधों से कई शहरों के प्रदूषण स्तर में गिरावट देखने को मिली थी इस दौरान दिल्ली के दो करोड़ लोगों ने गर्मियों में सबसे स्वच्छ हवा में सांस ली थी। हालांकि सर्दियों में पंजाब और हरियाणा में जलाई गई पराली के कारण जहरीली हवा से जूझना पड़ा था।

गंगा घाटी के इलाकों तक ही सीमित नहीं प्रदूषण
रिपोर्ट के मुताबिक दो दशक पहले के मुकाबले प्रदूषण सिर्फ गंगा घाटी तक ही सीमित नहीं रह गया है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में जिस तरह प्रदूषण बढ़ रहा है, वहां के निवासियों को की औसत जीवन प्रत्याशा में वर्ष 2000 के मुकाबले अतिरिक्त 2.5 से 2.9 वर्ष की कमी हो रही है।

इन देशों में भी भयावह स्थिति 
दक्षिण एशिया में पृथ्वी के सर्वाधिक प्रदूषित देशों में बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान है। यहां विश्व की करीब एक चौथाई आबादी रहती है। ये लगातार दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शीर्ष 5 देशों में बने हुए हैं।

5.4 साल बढ़ाई जा सकती है उम्र 
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुरूप प्रदूषण कम किया जा सकता है, तो औसत जीवन प्रत्याशा 5.4 वर्ष बढ़ सकती है। ईपीआईसी का कहना है कि 2019 के दौरान भारत में हवा में प्रदूषणकारी सूक्ष्म कणों की मौजूदगी औसतन 70.3 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी, जो दुनिया में सर्वाधिक और डब्ल्यूएचओ के 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से 7 गुना ज्यादा है।


सरकारें गंभीर, हर मोर्चे पर ठोस नीतियां जरूरी 
वायु प्रदूषण का सर्वाधिक असर दक्षिण एशिया में है। हालांकि क्षेत्र की सरकारें अब समस्या की गंभीरता समझ रही हैं। उसके निदान के लिए काम शुरू कर रही है। साफ हवा वह लंबी जिंदगी के लिए भारत का एनसीएपी वे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन महत्वपूर्ण कदम है। जीवाश्म ईंधन वैश्विक समस्या है। इसके लिए ठोस नीतियों की जरूरत है।  - केन ली, निदेशक, एक्यूएलआई

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