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Supreme Court: 'खेल संघों में पारदर्शिता के लिए उठाएं कड़े कदम, खत्म हो एकाधिकार', कोर्ट का केंद्र को निर्देश

Tue, 04 Feb 2025 09:07 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 04 Feb 2025 09:07 PM IST
सार

Supreme Court:  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय खेल संघों में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि स्वार्थी व्यक्तियों को बाहर किया जा सके। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कबड्डी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए और अगर चुनाव में गड़बड़ी पाई गई तो नए चुनाव कराए जाएंगे।

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Strong steps needed to bring purity, fairness, autonomy in sports bodies: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि भारतीय खेल संघों में पारदर्शिता, निष्पक्षता, स्वायत्तता और स्वतंत्रता लाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को बाहर किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने स्वार्थों के लिए इन संघों पर एकाधिकार बना रखा है। 

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केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने उनसे सीबीआई जांच और एशियाई कबड्डी महासंघ के तथाकथित अध्यक्ष की ओर से भारतीय एमेच्योर कबड्डी महासंघ (एकेएफआई) के प्रशासक को लिखे गए पत्र पर निर्देश लेने को कहा। 
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मौखिक दलीलों और एशियाई कबड्डी महासंघ के तथाकथित अध्यक्ष द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा को ध्यान में रखते हुए हमें लगता है कि चुनाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता, स्वायत्तता और स्वतंत्रता लाने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। खासकर उन लोगों को बाहर करने की जरूरत है, जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए खेल महासंघों पर एकाधिकार बना रखा है।  
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कोर्ट ने मेहता से यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया कि घरेलू कबड्डी खिलाड़ियों या अन्य खेल के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए, जिसमें ईरान में आयोजित होने वाले एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप भी शामिल है। इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र से खेल संघों, खासकर कबड्डी संघ की पहचान और मान्यता के मामलों को हल करने के लिए कूटनीतिक रास्तों का पता लगाने का निर्देश दिया। 


कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या भारतीय कबड्डी संघ का चुनाव वैध है और क्या राज्य के संघों का प्रतिनिधित्व सही तरीके से किया जा रहा है, यानी क्या केवल वैध चुने हुए या नामांकित लोग ही राष्ट्रीय चुनावों में भाग ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छह फरवरी तक के लिए टाल दिया और कहा कि अगर चुनाव में कोई समस्या पाई जाती है, तो वह नए चुनाव का आदेश देगी।  

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