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राहुल को अध्यक्ष बनाने की चाहत, समर्थकों को मिले और पांच महीने

Sun, 24 Jan 2021 03:42 AM IST
Jeet Kumar अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली।
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 24 Jan 2021 03:42 AM IST
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Strong effort to make Rahul gandhi congress president
राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कांग्रेस में राहुल गांधी को ही भावी अध्यक्ष के रूप में देखने की चाह रखने वाले उनके समर्थक नेता सीडब्ल्यूसी के चुनाव टालने के फैसले से खुश हैं। अध्यक्ष का चुनाव जून तक टलने से उन्हें लगता है कि इस बीच वे राहुल गांधी को अध्यक्ष बनने के लिए मना लेंगे।

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विधानसभा चुनाव तक पार्टी का संगठनात्मक चुनाव टाले जाने से कांग्रेस अपने नए अध्यक्ष को उस कसौटी से भी बचा लेगी जिस पर नतीजे आने के बाद कसा जाता।

कांग्रेस पार्टी के अधिकतर नेता गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। राजीव गांधी के निधन और सोनिया गांधी के तैयार न होने के बाद जब सीताराम केसरी को वरिष्ठता के चलते कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया तो कुछ ही दिनों में पार्टी में गुटबाजी शुरू हो गई।
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कांग्रेस में कई गुट बन गए लेकिन एक खेमा उस दौरान भी सोनिया गांधी के लगातार संपर्क में रहा और पार्टी की गतिविधियों की जानकारी देता रहा। हालात इस कदर बिगड़े कि पार्टी का बड़ा खेमा केसरी को हटाने पर अड़ गया और सोनिया ने जिम्मेदारी संभाली थी। आज भी कांग्रेस के पुराने नेता सीताराम केसरी के कार्यकाल को संगठन के लिहाज से सबसे खराब मानते हैं।
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राजीव गांधी के अत्यंत करीबी और उनके राजनीतिक सलाहकार रहे जितेंद्र प्रसाद ने भी एक समय सोनिया गांधी को चुनौती देते हुए उनके खिलाफ ताल ठोंकी थी। गांधी परिवार के हाथ में नेतृत्व से संतुष्ट कांग्रेस उस समय भी असंतुष्टों के साथ खड़ी नहीं हुई। लिहाजा पार्टी अध्यक्ष के लिए मतदान हुआ और जितेंद्र प्रसाद को 90 से कुछ अधिक वोट मिले थे।

हालांकि उसके बाद उनके बेटे जितिन प्रसाद कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे और असंतुष्टों के पत्र में हस्ताक्षर के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया गया है। कांग्रेस में गांधी परिवार से अलग अध्यक्ष बनाने की कोशिश इंदिरा गांधी के समय भी हुई तब इंदिरा गांधी ने अपनी अलग कांग्रेस-आई बना ली और उस दौरान भी पार्टी का बड़ा धड़ा उनके साथ ही रहा। असंतुष्ट गुट धीरे-धीरे समाप्त हो गया और कांग्रेस पर एक छत्र राज इंदिरा गांधी का हो गया।


कांग्रेस से निकलीं कई पार्टियां
समय-समय पर नारायण दत्त तिवारी की तिवारी कांग्रेस और पी.चिदंबरम की तमिल मानिल कांग्रेस भी अलग हुई लेकिन बाद में विलय हुआ। हालांकि महाराष्ट्र में शरद पवार की एनसपी, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी और आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेडड्ी की वाईएसआर कांग्रेस अपनी अलग राह और ताकत दिखाने में पूरी तरह सफल रहे।

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