फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Story of Mukhtar Ansari Krishnanad rai murder case attack on CM Yogi adityanath during mau riots

कहानी मुख्तार अंसारी की: अपराध की दुनिया में कदम रखते ही घरवालों ने करा दी शादी, फिर हुआ कुछ ऐसा कि...

Mon, 01 May 2023 10:29 AM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 01 May 2023 10:29 AM IST
विज्ञापन
सार
एक वक्त था जब मुख्तार और उसके परिवार की तूती बोलती थी। अपराध की दुनिया में वह काफी बड़ा नाम था। पूर्वांचल का कोई भी ऐसा सरकारी ठेका नहीं था, जो उसकी मंजूरी के बगैर किसी और को मिल जाए। सूबे की सियासत उसकी मुट्ठी में थी। वह जो बोलता था, वही होता था।
loader
Story of Mukhtar Ansari Krishnanad rai murder case attack on CM Yogi adityanath during mau riots
मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

माफिया से राजनेता बने मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को गैंगस्टर एक्ट में एमपी-एमएलए कोर्ट ने सजा सुनाई है। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्तार के भाई और बसपा सांसद अफजाल अंसारी को भी दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई है। ऐसे में उनकी लोकसभा सदस्यता जाने का खतरा है। 


मुख्तार के पूरे परिवार पर कई तरह के आपराधिक मामले चल रहे हैं। पत्नी से लेकर बेटा तक फरार है। मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। उमर अंसारी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया है। वहीं, पत्नी पर पहले से ही 50 हजार का इनाम है। 


एक वक्त था जब मुख्तार और उसके परिवार की तूती बोलती थी। अपराध की दुनिया में वह काफी बड़ा नाम था। पूर्वांचल का कोई भी ऐसा सरकारी ठेका नहीं था, जो उसकी मंजूरी के बगैर किसी और को मिल जाए। सूबे की सियासत उसकी मुट्ठी में थी। वह जो बोलता था, वही होता था। ऐसे में आज हम मुख्तार अंसारी की पूरी कहानी बताएंगे। कैसे उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते सूबे का सबसे नामी डॉन बन गया। आइए जानते हैं.... 
 

मुख्तार अंसारी
मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत मुख्तार के परिवार से करते हैं... 
मुख्तार अंसारी का जन्म 30 जून 1963 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हुआ। परिवार का काफी नाम था। लोग खूब सम्मान करते थे। मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1926-1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और फिर मुस्लिम लीग अध्यक्ष भी रहे।

कहा जाता है कि डॉ. अंसारी महात्मा गांधी के काफी करीबी थे। वह गांधीवादी विचारधारा से जुड़े थे। मुख्तार अंसारी के पिता सुब्हानउल्लाह अंसारी बड़े वामपंथी नेता थे। उन्होंने अपने परिवार की विरासत को बखूबी आगे बढ़ाया। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी रिश्ते में मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं।

मुख्तार अंसारी के ननिहाल की बात करें तो उनका भी समाज में काफी नाम रहा है। मुख्तार अंसारी के नाना बिग्रेडियर उस्मान आर्मी में थे और उन्हें उनकी वीरता के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। बिग्रेडियर उस्मान ने 1947 की जंग में भारत को नवशेरा में जीत दिलाई थी। वो इस युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गए थे और उनकी शहादत के बाद ही उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। 

मुख्तार अंसारी की शुरुआती पढ़ाई युसुफपुर गांव में हुई। इसके बाद उसने गाजीपुर कॉलेज से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की।  

 

मुख्तार और अफजाल अंसारी
मुख्तार और अफजाल अंसारी - फोटो : अमर उजाला
अपराध की दुनिया में कदम रखा तो घरवालों ने कर दी शादी
ये बात है 25 अक्तूबर 1988 की। आजमगढ़ के ढकवा के संजय प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना सिंह ने मुख्तार अंसारी सहित सात लोगों के खिलाफ कैंट थाने में हत्या के प्रयास के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में नौ अगस्त 2007 को मुख्तार को दोषमुक्त कर दिया गया। 1988 में ही मुख्तार अंसारी का नाम एक हत्या के मामले में सामने आया। मुख्तार अंसारी पर मंडी परिषद के ठेके के मामले में एक लोकल ठेकेदार सच्चिदानंद की हत्या के आरोप लगे। इतना ही नहीं इसी दौरान पुलिस से बचते हुए एक कॉन्स्टेबल की हत्या के आरोप भी मुख्तार अंसारी पर लगे लेकिन पुलिस को उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला। इसके बाद तो जैसे आए दिन मुख्तार अंसारी के अपराध से जुड़ने की खबरे आने लगी।

हालांकि, इस घटना के बाद मुख्तार के घरवाले भी परेशान हो गए। उन्होंने 1989 में अफशा अंसारी से मुख्तार की शादी करा दी। परिवार को लगा था कि शादी के बाद मुख्तार सुधर जाएगा, लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा। मुख्तार अपराध की दुनिया में कदम रख चुका था और परिवार के रसूख के चलते उसका दबदबा भी बनने लगा। 
 

माफिया मुख्तार अंसारी
माफिया मुख्तार अंसारी - फोटो : प्रयागराज
फिर बृजेश सिंह और मुख्तार का हुआ आमना-सामना
जिस वक्त गाजीपुर से मुख्तार ने अपराध की दुनिया में कदम रखा, उसी वक्त पूर्वांचल में एक और बड़ा नाम गूंज रहा था। वह नाम था बृजेश सिंह का। बृजेश के सिर पर माफिया त्रिभुवन सिंह का हाथ था। बृजेश का नाम अरुण सिंह था। बृजेश वाराणसी के धौरहरा गांव के किसान और स्थानीय नेता रविंद्र नाथ सिंह का बेटा है। आम परिवार की तरह बृजेश ने भी सपने देखे थे, लेकिन एक घटना से उसकी किस्मत बदल दी। कहा जाता है कि 12वीं पास करने के बाद बृजेश ने स्नातक में दाखिला लिया था। इसी बीच, 27 अगस्त 1984 में गांव के कुछ दबंगों ने बृजेश के पिता की हत्या कर दी। इसके बाद बदले की आग में बृजेश पूरी तरह से बदल गया। एक साल बाद बृजेश ने अपने पिता की हत्या का बदला ले लिया। पिता की हत्या के मुख्य आरोपी हरिहर सिंह की हत्या का आरोप बृजेश पर लगा। 

बृजेश को उस वक्त एक और माफिया का साथ मिला। वह था त्रिभुवन सिंह का। त्रिभुवन की कहानी भी कुछ बृजेश जैसी ही थी। यही कारण है कि दोनों में जल्दी दोस्ती हो गई। बृजेश और त्रिभुवन ने देखते ही देखते पूर्वांचल में अपनी अलग पहचान बना ली। दोनों बालू और स्क्रैप की ठेकेदारी करने वाले साहिब सिंह के लिए काम करने लगे। 

उधर, मुख्तार अंसारी इसी पेशे में साहिब सिंह के दुश्मन और विरोधी कहे जाने वाले मकनू सिंह के लिए काम करने लगा था। सरकारी ठेकों में वर्चस्व को लेकर मकनू और साहिब सिंह के बीच चल रही अदावत बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच भी शुरू हो गई। एक समय ऐसा आया कि दोनों अपने बॉस को छोड़कर खुद के दम पर काम करने लगे। मुगलसराय की कोयला मंडी, आजमगढ़, बलिया, भदोही, बनारस से लेकर झारखंड और बिहार तक की शराब तस्करी, स्क्रैप का कारोबार, रेलवे के ठेके से लेकर बालू के पट्टे तक को लेकर बृजेश और मुख्तार गैंग के बीच गोलियां चलने लगीं। 

 

पूर्व विधायक विजय मिश्रा, पूर्व एमएलसी बृजेश कुमार सिंह और पूर्व एमएलए मुख्तार
पूर्व विधायक विजय मिश्रा, पूर्व एमएलसी बृजेश कुमार सिंह और पूर्व एमएलए मुख्तार - फोटो : अमर उजाला
खूनी खेल के बीच, सियासत में रख दिया कदम   
बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह मुख्तार अंसारी के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके थे। जमीनी ठेकों को लेकर अक्सर दोनो के गैंग में कई सालों तक खूनी खेल चलता रहा। इस बीच, 2001 में बृजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी के काफिले पर जानलेवा हमला भी करवाया। इसमें मुख्तार बाल-बाल बच गया। मुख्तार का सियासी कद काफी बढ़ चुका था। इसके चलते बृजेश को यूपी छोड़कर भागना पड़ा। वह उड़ीसा पहुंच गया। यहां वह एक कारोबारी बनकर रहने लगा। 2008 में दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम ने बृजेश को उड़ीसा से गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में बृजेश ने भी सियासत में कदम रख दिया। बृजेश के बड़े भाई उदयभान सिंह दो बार एमएलसी रहे। पत्नी अन्नपूर्णां सिंह दूसरी बार विधायक चुनी गईं। 

उधर, बृजेश रास्ते से हटा तो मुख्तार अपना सिक्का चलाने लगा। गाजीपुर, मऊ, बनारस इन सभी इलाकों में मुख्तार ने अपना दबदबा कायम कर लिया। कुछ ही सालों में उनका गैंग काफी मजबूत हो गया था। कहा जाता है कि एक तरफ मुख्तार अंसारी अंडरग्राउंड होकर जमीन कब्जा, शराब के ठेके, रेलवे ठेकेदारी, खनन जैसे कई अवैधानिक कामों के जरिए पैसा बना रहा था, तो दूसरी ओर वो आम जनता की मदद करके अपनी छवि सुधारने का भी काम कर रहा था। यही मुख्तार का प्लान था। राजनीति में कदम रखने का। 

अंसारी परिवार पूर्वांचल में अच्छा खासा रुतबा रखता ही था और साथ ही मुख्तार अंसारी ने भी गरीब लोगों के बीच अपनी अलग छवि बना ली थी। इसी के सहारे उसने 1996 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर मऊ सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा। अंसारी ने इस चुनाव में जीत दर्ज की। यहीं से मुख्तार का सियासत में कदम मजबूत होने लगा। 

मुख्तार अंसारी हर बार मऊ सीट से ही चुनाव लड़ता जीत हासिल करता रहा। पांच बार लगातार विधायक चुना गया। 2002 और 2007 में मुख्तार अंसारी ने मऊ से ही निर्दलीय चुनाव लड़ा और उसमें भी जीत हासिल की। विधानसभा की सीट वो जीत ही रहे थे 2009 में बीएसपी से ही मुख्तार ने लोकसभा वाराणसी सीट पर अपनी किस्मत अजमाने की सोची लेकिन इस बार किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वो अपना पहला लोकसभा चुनाव हार गया। 2012 में मुख्तार अंसारी ने कौमी एकता दल के नाम से एक नई पार्टी बनाई और इसी पार्टी से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। 2017 में एक बार फिर मुख्तार अंसारी ने बीएसपी का रुख किया और मऊ से फिर विधायक चुना गया। 
 

मुख्तार अंसारी
मुख्तार अंसारी - फोटो : self
जब देश में गूंजने लगा मुख्तार का नाम
1988 में अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले मुख्तार ने 1996 में सियासत की सीढ़ी चढ़नी शुरू कर दी। लेकिन इस बीच, उसने अपने पुराने कामों को बंद नहीं किया। वह अपराध की जगत का बड़ा नाम था और सियासत के जरिए गरीबों के मददगार होने का ढोंग करता रहा। 

ये बात है साल 2005 की। ये किस्सा शुरू हुआ मुहम्मदाबाद सीट से। ये सीट 1985 से अंसारी परिवार के पास रही है और उस वक्त मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी इससे चुनाव लड़ रहे थे। 2002 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय ने अफजाल अंसारी को यहां से चुनाव में मात दी। कहते हैं ये बात मुख्तार अंसारी को नागवार गुजरी और कृष्णानंद राय, मुख्तार अंसारी के निशाने पर आए गए।

2005 में मऊ में हिंसा भड़की और हिंसा भड़काने के आरोप मुख्तार अंसारी पर लगे। मुख्तार अंसारी ने बड़ी ही चालाकी से इस मामले में गाजीपुर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसकी नियत में कुछ और ही था। मुख्तार के जेल में रहते हुए बाहर एक ऐसा खेल खेला गया जिसका आरोप भी मुख्तार अंसारी पर लगा। 

29 नवंबर 2005 को अफजाल अंसारी को हराने वाले भाजपा विधायक कृष्णानंद राय अपने काफिले के साथ गाजीपुर से एक क्रिकेट स्टेडियम का उद्घाटन करके लौट रहे थे। तभी उनके काफिले पर एके-47 से हमला हो गया। कहा जाता है कि हमलावरों ने पूरी गाड़ी को गोलियों से छलनी कर दिया। 400 से भी ज्यादा राउंड की फायरिंग हुई। कृष्णानंद समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इसका आरोप लगा मुख्तार अंसारी पर। कहा जाता है कि जेल में रहकर ही मुख्तार अंसारी ने शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी और अतीक उर रहमान की मदद से कृष्णानंद की हत्या करवाई। 
 

सीएम योगी आदित्यनाथ
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला।
मऊ दंगे के दौरान सीएम योगी पर भी हमले का आरोप 
मुख्तार पर कार्रवाई कर चुके रिटायर्ड आईपीएस शैलेंद्र सिंह कहते हैं, '2005 में जब मऊ में दंगे हुए तो गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ भाजपा के सांसद हुआ करते थे। उस दौरान उन्होंने मऊ दंगे के खिलाफ आवाज उठाई। योगी आदित्यनाथ मऊ का दौरा करने आ रहे थे, इसी बीच उनके काफिले पर बम से हमला हो गया था। हालांकि योगी को कुछ नहीं हुआ। इसका आरोप भी मुख्तार पर लगा।'
 

बाएं सीएम योगी और दाएं मुख्तार अंसारी। (फाइल फोटो)
बाएं सीएम योगी और दाएं मुख्तार अंसारी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
भाजपा के राज में अंसारी परिवार की बढ़ गई मुश्किलें 
मुख्तार अंसारी 2005 के बाद से ही अलग-अलग जेलों में बंद है। पहले उसे गाजीपुर जेल में रखा गया, उसके बाद मथुरा, आगरा, बांदा और फिर पंजाब जेल में भी लंबे समय तक रहा। पंजाब के रोपड़ जेल में तो मुख्तार अंसारी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने की खबरें भी सामने आईं थीं। कहा जा रहा था कि खुद कई जेल अधिकारी मुख्तार अंसारी की तीमारदारी में लगे हुए थे। यूपी सरकार की दखल के बाद मुख्तार को बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया। 

कहा जाता है कि 2017 में योगी सरकार आने के बाद से मुख्तार अंसारी और उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ती रहीं हैं। 
 मुख्तार की करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति को जब्त कर लिया गया है जबकी इस गैंग के कई गुर्गे अलग-अलग आरोपों में जेल में बंद हैं।  

मुख्तार का एक बेटा जेल में बंद है। उसकी पत्नी पर भी केस चल रहा है। दूसरा बेटा फरार चल रहा है। उसके खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है। मुख्तार की पत्नी भी 50 हजार की इनामी बदमाश है। वह भी लंबे समय से फरार चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed