पढ़िए, किताबें छोड़ बंदूक पकड़ने वाले रिसर्च स्कॉलर मन्नान वानी का हमजा भाई बनने का सफर...
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जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों ने गुरुवार को एक बड़े ऑपरेशन के दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराया। दोनों आतंकवादियों में से एक की पहचान हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर मन्नान वानी उर्फ हमजा भाई के रूप में हुई है। मन्नान वानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का पूर्व छात्र था। एएमयू में रिसर्च स्कॉलर रहा 26 वर्षीय वानी इसी साल तीन जनवरी को एएमयू से लापता हुआ था। बाद में पता चला था कि वह आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। हालांकि, इसके बाद एएमयू ने वानी को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया था।
एएमयू में पढ़ाई के दौरान मन्नान काफी होशियार छात्रों में शुमार होता था। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स को अब भी इस बात पर यकीन नहीं होता कि मन्नान आतंकवादी संगठन से जुड़ गया था। सैनिक स्कूल से पढ़ा वानी उन शिक्षित युवाओं में आता है जिन्होंने 2016 के बाद घाटी में आतंकवादी संगठनों का हाथ थामा। हिहजुल में शामिल होने के कुछ दिन बाद उसके बंदूक लिए एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उसे हमजा भाई कहा गया था।
प्रतिभाशाली छात्र था वानी
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक वानी प्रतिभाशाली छात्र था। पढ़ाई के दौरान वानी को कई पुरस्कार भी मिले थे। मन्नान वानी 2011 से एएमयू में पढ़ाई कर रहा था, जहां उसने एम. फिल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भूविज्ञान से पीएचडी में प्रवेश लिया था। कॉलेज की वेबसाइट पर आज भी उसका नाम उसे मिले पुरस्कारों के साथ दर्ज है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण कश्मीर के कुछ छात्रों के संपर्क में आने के बाद वानी ने आतंकवाद की राह पकड़ी। इस साल तीन जनवरी को उसने आतंकवादी संगठन का हिस्सा बनने के लिए अलीगढ़ छोड़ दिया था।
लेक्चरर पिता से था बेहद लगाव
मन्नान वानी के पिता बशीर अहमद वानी कॉलेज लेक्चरर हैं। बताते हैं कि मन्नान का अपने पिता से बेदह लगाव था। वानी के आतंकवादी संगठन में शामिल होने का पता चलने पर उसके पिता ने कहा था कि उसने जो किया है अपने और समाज के लिए बहुत गलत किया है। उन्होंने कहा कि जो वह करना चाहता था उसके और भी रास्ते थे। उन्होंने कहा था कि आखिरी बार उनकी मन्नान से 3 जनवरी को फोन पर सामान्य बात हुई थी।
एएमयू की छात्र राजनीति में दखल रखता था मन्नान
मन्नान वानी एएमयू की छात्र राजनीति में काफी दखल रखता था। दिसंबर 2017 में आयोजित एएमयू छात्र संघ चुनाव के दौरान भी वह बेहद सक्रिय था। कुछ वर्ष पहले के चुनाव में भी उसने एक छात्र नेता को चुनाव लड़ाने एवं जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। यह अलग बात है कि वह खुलकर कभी सामने नहीं आया।
जम्मू-कश्मीर के छात्रों के बीच वह कश्मीर की आजादी का कट्टर समर्थक था। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद आजादी से संबंधित एक कैलेंडर जारी करने को लेकर उसका नाम चर्चा में आया था, लेकिन उस समय यह मामला दब गया था या दबा दिया गया था। मन्नान के करीबी उसके विचार एवं तुनकमिजाजी से आशंकित रहते थे और उसे समझाने का प्रयास भी करते थे।
जम्मू-कश्मीर के छात्रों की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों की मानें तो एएमयू में जम्मू-कश्मीर के छात्रों के दो गुट हैं। यह भी चर्चा है कि एक गुट द्वारा दिल्ली में मन्नान बशीर वानी की शिकायत की गई थी। हालांकि इस संबंध में कुछ भी बोलने से जम्मू-कश्मीर के छात्र कतराते हैं।
जनवरी में हबीब हॉल से हुआ था लापता
एएमयू में पढ़ाई के वक्त वानी हबीब बॉल में रहा करता था। वह जनवरी 2018 में अचानक एएमयू से गायब हो गया था। उसके आतंकी संगठन में शामिल होने के चर्चाओं से संबंधित खबर सबसे पहले अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। अलीगढ़ के तत्कालीन एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने हबीब हॉल में छापा मारकर मन्नान वानी का कमरा सील कर दिया था। बाद में खबर आयी कि वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। उससे संबंधित तस्वीरें सोशल मीडिया में आयी थी।
मन्नान वानी ने 2013 में एमएससी में भूगर्भ विज्ञान विभाग में दाखिला लिया था। यहीं से 2014-15 में एमफिल की। उसके बाद विभाग के प्रो. सैयद अली अहमद के निर्देशन में शोध कर रहा था। एमफिल एवं एमएससी के दौरान वह हबीब हॉल के कमरा नंबर क्रमश: 72 एवं 41 में रहा। नवंबर 2016 में पीएचडी में दाखिला लिया। उस समय वह हबीब हॉल के कमरा नंबर 237 में रहता था। यहीं से वह लापता हुआ था।
घाटी में हुए प्रदर्शनों से दूर था
जम्मू कश्मीर में चाहे 2010 में हुए विरोध प्रदर्शन हों या हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की नौत के बाद 2016 में हुए प्रदर्शन हों, मन्नान वानी इन सबसे दूर ही था। उसके मुजाहिदीन में शामिल होने की बात तब पता चली जब बाबा गुलाम शाह बदशाह विश्वविद्यालय से बीटेक कर रहे ईसा फजली और अन्य युवकों के आतंकवादी गिरोह में शामिल होने की जानकारी पता चली। मन्नान वानी के बाद, तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ सेहराई का बेटा व एमबीए का छात्र जुनैद अशरफ सहराई भी आतंकवादी संगठन ज्वाइन करने के लिए लापता हो गया था।
अलीगढ़ पुलिस की फाइलों में गुमशुदा दर्ज है मन्नान
जम्मू कश्मीर में सेना के हाथों मारे गया हिजबुल कमांडर और एएमयू का पूर्व छात्र मन्नान वानी अलीगढ़ पुलिस की फाइलों में गुमशुदा के रूप में दर्ज है। नौ महीने पहले उसके विश्वविद्यालय से अचानक लापता हो जाने के बाद एएमयू इंतजामिया की ओर से थाना सिविल लाइन में उसकी गुमशुदी दर्ज करायी गई थी। थाना सिविल लाइन के इंस्पेक्टर विनोद कुमार बताते हैं कि जनवरी महीने में एएमयू के हबीब हाल के प्रोवोस्ट की ओर से उसकी गुमशुदी की तहरीर दी गई थी। जिसमें कहा गया था कि दो जनवरी 2018 से उसे देखा नहीं गया है।
एक बार कैंपस छोड़ने के बाद मन्नान का अलीगढ़ में कुछ सुराग नहीं लगा था। अलीगढ़ पुलिस, खुफिया एजेंसियों आदि ने मन्नान के साथ पढ़ने वाले अन्य छात्र, संपर्क रखने वालों आदि से पूछताछ कर ली थी लेकिन उसने जाने से पहले किसी को कुछ भी ऐसा संकेत नहीं दिया था कि वह कहां जा रहा है। अब ताजा घटना क्रम के बाद पुलिस जम्मू कश्मीर से दर्ज रिपोर्ट की प्रति मंगवाएगी और जिसके आधार पर इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट लग जाएगी।
मन्नान का अलीगढ़ से निकलना आज भी रहस्य
देशहित सर्वोपरि : एएमयू
एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो शाफे किदवई का कहना है कि मन्नान वानी से एएमयू का कोई संबंध नहीं है। करीब नौ महीने पहले उसे विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय देश विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। इस मामले में जीरो टालरेंस की नीति है। एएमयू के लिए देशहित सर्वोपरि है।