तो चुनाव बाद अखिलेश से सौदेबाजी करेंगे शिवपाल?
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कुछ दिन पहले रामपुर में समाजवादी पार्टी की एक चुनावी रैली में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आए थे। वहां लोगों ने कहा कि 'नेता जी' अब पार्टी के लिए प्रचार करने को तैयार हो गए हैं। नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव तैयार जरूर हुए, लेकिन अपने भाई के लिए।
उन्होंने कल जसवंतनगर चुनावी छेत्र में इस चुनाव में पहली बार एक सभा को संबोधित किया।यहाँ से उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। जब से यादव परिवार में युद्ध छिड़ा है मुलायम सिंह ने अपने बेटे अखिलेश के लिए प्रचार नहीं किया है।
आखिरी समय में चाचा को दिया टिकट
इस घरेलू लड़ाई में ऐसा लगा कि अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल सिंह से बगावत की है। लड़ाई के बाद पार्टी की बागडोर अखिलेश ने संभाली और चुनावी मैदान में अपने पसंद के लोगों को उतारा। ऐसा लगा कि पार्टी दो हिस्सों में विभाजित हो जाएगी।
लेकिन आखिरी समय में अखिलेश यादव ने अपने चाचा का ख्याल रखते हुए उन्हें जसवंतनगर से टिकट दिया जहाँ शिवपाल यादव 1996 से चुनाव जीतते आ रहे हैं। सभा एक खुले मैदान में आयोजित की गई थी। बड़े-बड़े पोस्टरों में मुलायम सिंह और शिवपाल सिंह के चेहरे मुस्कुराकर लोगों का स्वागत कर रहे थे।
अभी बूढ़ी नहीं हुई है समाजवादी पार्टी
जाड़े की धूप में लोग नेता जी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जब सभा को स्थानीय नेता संबोधित कर रहे थे तो लोगों में जोश नहीं नजर आया। लेकिन जैसे ही मुलायम सिंह का हेलीकॉप्टर जमीन पर उतरा एकदम से लोग उन्हें देखने उमड़ पड़े। मुलायम सिंह को सुनने चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश दोनों के समर्थक आए थे।
लोगों का कहना था मुलायम सिंह का भाषण पार्टी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा। नेता जी ने लोगों से शिवपाल सिंह को जिताने की अपील की। सीधे तौर पर अपने बेटे या पारिवारिक झगड़ों के बारे में कुछ नहीं कहा। उनका एक बयान लोगों को बहुत भाया। उन्होंने जब कहा कि समाजवादी पार्टी बूढी नहीं हुई है। अब भी जवान है तो इसका स्वागत लोगों ने तालियों और नारों से किया।
तो चुनाव के बाद अखिलेश से सौदाबाजी करेंगे शिवपाल?
सभा शिवपाल की थी लेकिन अखिलेश के समर्थक काफी संख्या में मौजूद थे। पार्टी के समर्थक अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। वो पारिवारिक झगड़े से अधिक प्रभावित नजर नहीं आ रहे थे। कुछ कार्यकर्ताओं के अनुसार अखिलेश यादव की बाप से बगावत के कारण जमीन पर कार्यकर्ताओं में जोश की काफी कमी है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार परिवार में पड़े दरार को ऊपर से पाट दिया गया है। मतभेद गहरा है। अखिलेश यादव ने जिन लोगों टिकट दिए हैं, उनमें 35-40 शिवपाल के गुप्त समर्थक हैं। चुनाव में जीत के बाद शिवपाल सिंह 'अपने' जीते हुए विधायकों के साथ अखिलेश यादव से सौदेबाजी करेंगे। यानी पारिवारिक उठापटक दोबारा शुरू हो सकती है।
पिता-चाचा रैली में बुजुर्ग अधिक थे। तीन दिन पहले बेटे अखिलेश की रैली में युवा अधिक थे। रामपुर की रैली जसवंतनगर की रैली से कहीं बड़ी थी। रामपुर की रैली में लोग आखिर तक डटे रहे। लेकिन जसवंतनगर की सभा में मुलायम सिंह के भाषण के दौरान सैकड़ों लोग मैदान छोड़ कर वापस जाने लगे। जो लोग मंच के सामने कुर्सियों पर बैठे थे वो भाषण खत्म होने तक वहीं जमे रहे।