लागत कम करने को निर्माण में लगेंगे तांबा खदान से निकले पत्थर
- 250 करोड़ टन तांबा खनन में निकला पत्थर खरीदेगा रेलवे
- हिंद कॉपर को होगा 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा
- कम कीमत पर रेलवे को मुहैया होगी निर्माण सामग्री
- बेकार समझा जाने वाला पत्थर बना अतिरिक्त आय का साधन
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नदियों के तटों पर खनन करने की पाबंदी से बढ़ी निर्माण सामग्री की किल्लतों को दूर करने का रास्ता सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) ने निकाल लिया है। उसके पास तांबा खनन के दौरान निकला 250 करोड़ टन पत्थर है। इसका उपयोग बजरी, गिट्टी और रेत के तौर पर रेलवे निर्माण कार्य के दौरान किया जाएगा, जिससे कंपनी को कम लागत में निर्माण सामग्री मिलेगी। एचसीएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संतोष शर्मा ने कहा कि हम जिस पत्थर को कल तक बेकार समझ रहे थे, वह आज हमारे लिए अतिरिक्त आय का साधन बन गया है।
उन्होंने बताया कि रेलवे से एचसीएल इस मुद्दे पर फौरी चर्चा कर चुका है। उसके खनन के दौरान निकला पत्थर बहुत उपयोगी है, जिसे वह पटरियों पर गिट्टी के तौर पर उपयोग में ला सकता है। इसके अलावा पत्थर के चूरे को रेत के तौर पर भी उपयोग में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे एचसीएल को करीब 10 हजार करोड़ की आय होगी। वहीं निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों के दौर में रेलवे को सस्ती दर पर सामग्री मुहैया होगी, जो नई परियोजनाओं में खासतौर पर उपयोगी होगी।
विकास को समर्थन देगा यह फैसला
एचसीएल के महाप्रबंधक विनय कुमार सिंह ने बताया कि तांबा के खुले खनन में यह पत्थर निकला है। मौजूदा समय नदियों से बजरी और रेत के खनन पर विभिन्न राज्यों में रोक है। ऐसे में सरकारी महकमों, खासतौर पर रेलवे और सड़क निर्माण विभाग के लिए निर्माण सामग्री को सही कीमत पर जुटाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में पत्थर को सरकारी महकमों को बेचने की हमारी पहल देश के विकास में साथ देने की है।
निजी क्षेत्र भी इस ओर देख रहा है, लेकिन एचसीएल ने रेलवे को यह सामग्री बेचने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि एचसीएल ने खुले में खनन के बाद जमीन के भीतर खनन की शुरुआत मध्य प्रदेश के मलाजखंड में कर दी है। हमारे देश में तांबा बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है और एचसीएल 5 से 7 फीसदी तांबा देश को मुहैया कराता है, जो सबसे बेहतर गुणवत्ता का होता है।
रेलवे बिछाएगा अपनी लाइन
एचसीएल के सूत्रों के मुताबिक, रेलवे अपनी एक लाइन मलाजखंड तक पहुंचाने की तैयारी में है, ताकि वह एचसीएल के खनन के बाद शेष रहने वाली सामग्री का पूरा उपयोग कर सके। साथ ही एचसीएल को भी इससे लाभ होगा, क्योंकि वह आसानी से खनन क्षेत्र से तांबा निर्धारित स्थान तक पहुंचा सकेगा। गौरतलब है कि खनन में पत्थर लगातार निकलता रहता है। ऐसे में एचसीएल तमाम सरकारी महकमों की जरूरत पूरी करने में सक्षम है।