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सरकारी एजेंसी को जानकारी दिए बगैर स्टिंग का मामला गंभीर: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 14 Feb 2017 07:22 AM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 14 Feb 2017 07:22 AM IST
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sting operation is serious issue SAYS Supreme Court
सांकेतिक चित्र

कानून का पालन करवाने वाली एजेंसी के अधिकारियों को शामिल किए बिना टीवी चैनलों द्वारा सरकारी नौकरों पर किए जाने वाले स्टिंग ऑपरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर मसला बताया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस संबंध में रेगुलशन (नियामक) जरूरी है।

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न्यायूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा है कि सभी स्टिंग ऑपरेशनों को रेगुलेट करने की जरूरत है। पीठ ने माना कि सरकारी नौकरों का पर्दाफाश करने के लिए टीवी चैनलों द्वारा किए जाने वाले स्टिंग ऑपरेशनों में कानून पालन करवाने वाली एजेंसी के अधिकारियों को शामिल किया जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक टीवी चैनल के निदेशक और उसके दो रिपोर्टरों के खिलाफ आरोप तय करने के बंगलूरू कोर्ट के एक आदेश के फैसले को खारिज करने से इनकार करते हुए की है। मामले के मुताबिक, दो रिपोर्टरों ने खुद को लंदन की एक कंपनी का प्रतिनिधि बताकर कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार को कुछ पैसे देने की कोशिश की थी। मंत्री को उन रिपोर्टरों पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने उन दोनों को पुलिस के हाथों गिरफ्तार करवाया था।

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'रिपोर्टरों ने सिर्फ पत्रकारिता के अपने दायित्व का निर्वाह किया'

sting operation is serious issue SAYS Supreme Court

टीवी चैनल के निदेशक और रिपोर्टरों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने गत 18 नवंबर को हाईकोर्ट द्वारा दिए फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। वरिष्ठ वकील ने पीठ के समक्ष कहा कि वह अपरिपक्व स्टिंग ऑपरेशन था। उन्होंने कहा कि दोनों रिपोर्टरों ने सिर्फ पत्रकारिता के अपने दायित्व का निर्वाह किया था। 

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-12 इस मामले में नहीं लागू होता क्योंकि याचिकाकर्ता सरकारी नौकर नहीं हैं। वे महज एजेंट होने का अभिनय कर रहे थे।
इस पर पीठ ने कहा कि अगर कोई मंत्री के पास जाता है और उसे रिश्वत देने की कोशिश करता है और पकड़ा जाता है, ऐसे में उसे ट्रायल के दौरान खुद को निर्दोष साबित करना होगा। पीठ ने कहा कि उन्होंने अपने पेशे के अधिकारों के दायरे में रहकर काम किया है नहीं, इसका परीक्षण किया जाएगा।

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