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Naxalism: सीआरपीएफ को मिला पहले 'बस्तरिया बटालियन' के गठन का जिम्मा, युवाओं में दिख रहा भारी जोश
Tue, 11 Oct 2022 08:21 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 11 Oct 2022 08:21 PM IST
सार
सीआरपीएफ के अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान को स्थानीय युवाओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जो देश की सेवा करने की तीव्र इच्छा के साथ बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।
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नक्सलियों के खिलाफ अभियान
- फोटो : ANI
विस्तार
नक्सलवाद को खत्म करने के लिए एक और कदम के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में दक्षिण छत्तीसगढ़ के तीन जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से 400 उम्मीदवारों का चयन करने के लिए एक लंबे समय से प्रतीक्षित भर्ती अभियान शुरू हो गया है, ताकि 'बस्तरिया बटालियन' को मजबूत किया जा सके। ये जंगल युद्ध रणनीति में विशेषज्ञता रखने वाली एक विशेष इकाई है। 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक आयोजित 10-दिवसीय अभियान का उद्देश्य सीआरपीएफ की 'बस्तरिया बटालियन' में कांस्टेबल के पद के लिए 400 उम्मीदवारों का चयन करना है, जिसे सीआरपीएफ ने 2016-17 में स्थानीय लोगों की भर्ती करके शुरू किया था।
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अभियान को स्थानीय युवाओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली
सीआरपीएफ के अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान को स्थानीय युवाओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जो देश की सेवा करने की तीव्र इच्छा के साथ बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएनआई को बताया कि बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा के स्थानीय युवाओं के लिए पात्रता मानदंड को आसान बनाए जाने के गृह मंत्रालय द्वारा अपनाए गए कदम का परिणाम है, ताकि वे सीआरपीएफ में शामिल हो सकें। केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए सीआरपीएफ में शामिल होने के लिए शैक्षिक मानदंडों में ढील देने के लगभग चार महीने बाद यह कदम उठाया गया है।
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इस साल जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ के तीन नक्सल प्रभावित जिलों- बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा के आदिवासी युवाओं के लिए सीआरपीएफ में शामिल होने के लिए पात्रता मानदंड में ढील दी थी। मंत्रिमंडल ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के तीन जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से सीआरपीएफ में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) के रूप में 400 उम्मीदवारों की भर्ती के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कक्षा 10 से कक्षा 8 तक छूट देने के अपने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। विशेष रूप से 2016-17 में सीआरपीएफ ने एक बस्तरिया बटालियन बनाई, जहां युवाओं को मुख्य रूप से राज्य के बस्तर क्षेत्र के बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा जिलों से भर्ती किया गया था।
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कई युवा न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पात्रता मानदंड को पूरा नहीं कर सके
सरकार ने तब स्थानीय लोगों को बल में शामिल होने में मदद करने के लिए भर्ती के लिए विशिष्ट भौतिक मापदंडों में ढील दी थी। इस कदम का उद्देश्य बल में भाषा, संस्कृति, स्थलाकृति और जनसांख्यिकी के स्थानीय ज्ञान वाले लोगों को शामिल करना था ताकि इसके खुफिया संग्रह और संचालन को मजबूत किया जा सके। हालांकि, इससे खास परिणाम नहीं मिल सके क्योंकि बहुत से युवा न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पात्रता मानदंड को पूरा नहीं कर सके, जो कि कक्षा 10 था। गृह मंत्रालय के अनुसार, नए पात्रता मानदंड के तहत रंगरूटों को अभी भी कक्षा 10 पास करने की आवश्यकता होगी। फोर्स में शामिल होने के बाद इस प्रयास में उनकी मदद करने की जिम्मेदारी सीआरपीएफ के पास होगी।