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बांग्लादेश सीमा पर स्टील के कंटीले तार लगाने की परियोजना पर लगी ‘जंग’
Sun, 16 Feb 2020 10:04 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 16 Feb 2020 10:04 PM IST
सार
सरहद पार से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्टील के तारों की बाड़ लगाने की परियोजना अधर में लटक गई है।
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भारत-बांग्लादेश सीमा
- फोटो : File
विस्तार
सरहद पार से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्टील के तारों की बाड़ लगाने की परियोजना लटक गई है। इसकी वजह पड़ोसी देश के सीमा सुरक्षा बल (बीजीबी) से इसकी अनुमति अभी तक नहीं मिल पाई है। इन तारों की सबसे बड़ी खासियत है कि इन्हें काटा नहीं जा सकता है।
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बीएसएफ प्रवक्ता शुभेंदु भारद्वाज ने कहा, हमने कुछ साल पहले सीमा पर बाड़ लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बीजीबी से अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। बांग्लादेश सीमा पर कुल 4096 किलोमीटर सरहद में करीब 96 किलोमीटर तक नए कंटीले तार लगाए जाने हैं।
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गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, भारत ने बांग्लादेश और पाकिस्तान से लगती सीमा पर घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील स्थानों पर स्टील के तारों की बाड़ लगाने का फैसला किया है।
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इससे निश्चित तौर पर पाक सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ, हथियार व प्रतिबंधित चीजों की तस्करी पर रोक लगेगी, वहीं बांग्लादेश सीमा पर दोनों ओर से नागरिकों के मारे जाने का एक बड़ा मुद्दा भी सुलझ जाएगा।
बाड़ लगाने में प्रति किलोमीटर दो करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस तार को काटा नहीं जा सकेगा और न ही इस पर चढ़ा जा सकेगा। इसके अलावा यह जंग रोधक भी होगा। अधिकारी के मुताबिक, बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ जवान जब अपराधों को रोकते हैं तो उन पर हमला होता है। ऐसे में बाड़ लगने से ये घटनाएं रुक जाएंगी।