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Cyber Crime: 'प्याज के छिलके' वाली तकनीक से लैस अपराधी, इनका वजूद मिटाने को मिला धन खर्च नहीं कर पा रहे राज्य

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 13 Feb 2023 06:00 PM IST
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सार
Cyber Crime: मौजूदा समय में न केवल साइबर अपराधी, बल्कि आतंकी संगठन भी 'डार्क वेब' का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसे 'प्याज के छिलके' उतारने वाली तकनीक भी कहा जाता है। सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के लिए अभी इस तकनीक का तोड़ निकालना, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है...
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States are not able to spend the funds received to control Cyber Crime
Cyber Crime - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों को आर्थिक मदद दी जाती है। हैरानी की बात है कि अधिकांश राज्य, उस राशि को खर्च ही नहीं कर पा रहे हैं। नतीजा, अगले वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र द्वारा कोई राशि जारी नहीं की जाती। वजह यह बताई जाती है कि पिछले वर्ष की राशि अभी बची हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का 2018-19 से लेकर 2021-22 तक के आंकड़ें देखें, तो छत्तीसगढ़, कर्नाटक, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्य ही ऐसे हैं, जिन्होंने साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए राशि खर्च की है। इन राज्यों को उक्त अवधि के दौरान हर साल राशि आवंटित की गई है। वह राशि खर्च हुई तो उन्हें आगामी वर्ष के लिए भी राशि जारी कर दी गई। आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गुजरात, झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, पंजाब, ओडिशा, तमिलनाडु, सिक्किम, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल को गत वर्षों में इसलिए कम राशि जारी की गई, क्योंकि वे पहले से मौजूद राशि को खर्च नहीं कर सके थे। कुछ राज्यों की दो वर्ष में जारी हुई राशि 'शून्य' रही है।

सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के लिए चुनौती

मौजूदा समय में न केवल साइबर अपराधी, बल्कि आतंकी संगठन भी 'डार्क वेब' का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसे 'प्याज के छिलके' उतारने वाली तकनीक भी कहा जाता है। सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के लिए अभी इस तकनीक का तोड़ निकालना, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। डार्क वेब या डार्क नेट, आतंकी गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग व ड्रग्स की बुकिंग और सप्लाई का बड़ा जरिया बन चुका है। डार्क वेब का इस्तेमाल करने से इंटरनेट पर असली यूजर सामने नहीं आता। यूजर कहां पर है, उसकी ट्रैकिंग और सर्विलांस, जांच एजेंसियों के लिए यह काम बहुत मुश्किल होता है। अब साइबर अपराधी भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। गत वर्ष हैकरों ने दिल्ली के एम्स सहित कई सरकारी विभागों और मंत्रालयों में सेंध लगाने की कोशिश की थी। कई दिनों तक एम्स का सर्वर चालू नहीं हो सका था।

राज्य की एजेंसियों से छिपा रहता है यह चैनल

वित्त प्रेषण के लिए आतंकी और साइबर अपराधी, अनियमित चैनल जैसे 'यूज ऑफ कैश कूरियर' का उपयोग करने लगे हैं। वजह, इसकी तेज स्पीड, भरोसा, उपभोक्ता पहचान चेक व ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की कमी आदि बातें, अपराधियों को खूब पसंद आ रही हैं। इस तकनीक के जरिए आतंकी संगठन, ट्रांजेक्शन को संबंधित राज्य की एजेंसियों की जांच से छिपा लेते हैं। आतंकी फंडिंग व क्राउड सोर्स आदि के लिए 'डार्क वेब' का प्रयोग किया जाने लगा है। आजकल आतंकी संगठन, डार्क वेब का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे 'टोर' और 'द ओनियन राउटर' कहा जाता है। इस नेटवर्क में 'यूजर' को छिपा रहता है। आतंक, नशा, हथियार और साइबर क्राइम जैसे अपराधों में अब यही तकनीक इस्तेमाल हो रही है।

राज्यों को चार वर्ष में जारी की गई है ये राशि

'पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए राज्यों को सहायता', योजना के तहत गत चार वर्ष के दौरान आवंटित और जारी राशि में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। अनेक राज्य ऐसे हैं जो आवंटन राशि को तय समय पर खर्च नहीं कर पा रहे हैं। नतीजा, आगामी वर्ष के लिए संबंधित राज्य को केंद्र द्वारा जो राशि आवंटित होती है, उसमें कटौती हो जाती है। राज्यों को 2018-19 में 607.25 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि 758.5 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2019-20 में आवंटित राशि 561 करोड़ रुपये और जारी हुई राशि 780.89 करोड़ रुपये थी। 2020-21 में 521.1 करोड़ रुपयों के आवंटन के मुकाबले जारी हुई राशि 103.02 करोड़ रुपये रही थी। इस वर्ष अधिकांश राज्यों को आवंटन के विरुद्ध वित्तीय राशि इसलिए जारी नहीं की जा सकी, क्योंकि उनके पास पर्याप्त अव्ययित शेष राशि थी। अगले वर्ष भी 521.1 करोड़ रुपयों का आवंटन हुआ, जबकि जारी हुई राशि 158.39 करोड़ रुपये थी।

आवंटित राशि के खर्च को लेकर राज्यों की स्थिति

आंध्रप्रदेश को 2018-19 में 26.48 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन जब राशि जारी करने की बारी आई तो वह संख्या 50.81 करोड़ पर पहुंच गई। इसी तरह 2019-20 में भी 24.96 करोड़ रुपये के आवंटन की एवज में 75.36 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2020-21 में आवंटन राशि 24.46 करोड़ रुपये थी, जबकि जारी राशि 5.83 करोड़ रुपये थी। 2021-22 में आवंटन राशि 24.46 करोड़ रुपये और जारी राशि शून्य रही। अरुणाचल प्रदेश को 2018-19 में आवंटित 4.25 करोड़ रुपये के मुकाबले 10.34 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके बाद 2019-20 में आवंटन की राशि 3.92 करोड़ रुपये और जारी राशि शून्य रही। इसी तरह 2021-22 में भी 3.92 करोड़ रुपये की राशि का आवंटन हुआ, लेकिन जारी राशि शून्य ही रही। बिहार भी उन राज्यों में शामिल रहा, जिन्होंने केंद्र से मिली राशि का पूरा इस्तेमाल नहीं किया। इस राज्य को 2018-19 में 29.9 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था। जारी राशि का ग्राफ 13.18 करोड़ रुपये था। 2019-20 में आवंटन की राशि 27.62 करोड़ रुपये और जारी राशि 9.42 करोड़ रुपये थी। अगले वित्तीय वर्ष में भी इतनी ही राशि का आवंटन हुआ। उसमें जारी राशि 19.12 करोड़ रुपये थी। 2021-22 में भी दोबारा से 27.62 करोड़ रुपये आवंटित हुए। इसमें जारी राशि शून्य रही।

ये है छत्तीसगढ़ और गुजरात की स्थिति

छत्तीसगढ़ को भले ही कई राज्यों के मुकाबले कम राशि आवंटित और जारी हुई, लेकिन वहां उस राशि का इस्तेमाल खूब हुआ है। इस राज्य को 2018-19 में 10.52 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। जारी राशि 8.56 करोड़ रुपये थी। 2019-20 में 9.72 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि 8.35 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2020-21 में आवंटित राशि 9.72 करोड़ रुपये और जारी हुई राशि 7.16 करोड़ रुपये थी। 2021-22 में भी 9.72 करोड़ रुपयों के आवंटन के मुकाबले 5.44 करोड़ रुपये जारी किए गए। गुजरात को जितनी राशि आवंटित की गई थी, उससे जारी हुई राशि कहीं अधिक थी। इस राज्य को 2018-19 में 27.69 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि 52.62 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2019-20 में आवंटित राशि 25.58 करोड़ रुपये और जारी हुई राशि 41.19 करोड़ रुपये थी। 2020-21 में 25.58 करोड़ रुपयों के आवंटन के मुकाबले जारी हुई राशि शून्य रही थी। अगले वर्ष भी 25.58 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, मगर कोई राशि नहीं हो सकी।

महाराष्ट्र, यूपी और राजस्थान, कोई आगे तो कोई पीछे

महाराष्ट्र को 2018-19 में 51 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि 9.58 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2019-20 में आवंटित राशि 47.11 करोड़ रुपये और जारी हुई राशि 65.98 करोड़ रुपये थी। 2020-21 में 47.11 करोड़ रुपयों के आवंटन के मुकाबले जारी हुई राशि शून्य रही थी। अगले वर्ष यानी 2021-22 में भी 47.11 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, मगर कोई राशि नहीं हो सकी। राजस्थान को 2018-19 में 33.83 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि 62.59 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2019-20 में आवंटित राशि 31.26 करोड़ रुपये और जारी हुई राशि 27.28 करोड़ रुपये थी। 2020-21 में 31.26 करोड़ रुपयों के आवंटन के मुकाबले जारी हुई राशि 13.53 करोड़ रुपये रही थी। अगले वर्ष भी 31.26 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जबकि जारी हुई राशि 13.53 करोड़ रुपये थी। उत्तर प्रदेश को 2018-19 में 68.39 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जबकि 118.67 करोड़ रुपये जारी किए गए। 2019-20 में आवंटित राशि 63.19 करोड़ रुपये और जारी हुई राशि 64.81 करोड़ रुपये थी। 2020-21 में 63.19 करोड़ रुपयों के आवंटन के मुकाबले जारी हुई राशि 63.19 करोड़ रुपये रही थी। अगले वर्ष भी 63.19 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जबकि जारी हुई राशि 32.02 करोड़ रुपये थी।

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