विश्वास के 75 वर्ष: 'अमर उजाला पढ़ते रहिए और अपना ज्ञान बढ़ाते रहिए', स्टार्टअप्स जगत के दिग्गजों ने दी बधाई
अमर उजाला ने अपने प्रकाशन के गौरवशाली 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर देश के स्टॉर्टअप जगत के दिग्गजों ने अमर उजाला को बधाई दी है। स्टार्टअप जगत के इन चेहरों ने आम जनमानस को अहम सूचनाएं और विश्लेषणों के माध्यम से जागरूक करने के लिए अमर उजाला की सराहना की है और अपनी यादें साझा की हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमर उजाला ने अपने प्रकाशन के गौरवशाली 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर देश के स्टॉर्टअप जगत के दिग्गजों ने अमर उजाला को बधाई दी है। स्टार्टअप की दुनिया के इन चेहरों ने आम जनमानस को अहम सूचनाएं और विश्लेषण के माध्यम से जागरूक करने के लिए अमर उजाला की प्रशंसा की है। इस खास मौके पर इन्होंने अमर उजाला से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए हैं।
करण खन्ना, भारत पे
इस कड़ी में भारत पे से जुड़े करण खन्ना ने कहा, "मैं लखनऊ से हूं और पिछले 20 सालों से दिल्ली का निवासी हूं। मैं भारतपे कंपनी के पांच साल के सफर के शुरुआती दिनों से अहम हिस्सा रहा हूं और उसकी सफलता में मेरा अहम रोल रहा है। अमर उजाला की यादें बचपन से जुड़ी हैं। यह ऐसा अखबार है जो जन-जन में बसता है। जिसकी वजह से यह आज भारत का सबसे लोकप्रिय अखबार है। अमर उजाला और उसके समस्त पाठकों को मेरी तरफ से उनकी 75वीं सालगिरह पर ढेर सारी शुभकामनाएं, जय हिंद।"
आलोक वाजपेयी, ixigo, को-फाउंडर
वहीं, ixigo के को-फाउंडर आलोक वाजपेयी बोले, "मैं बचपन में यूपी में पला-बढ़ा हूं। इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ में रहा हूं। मैंने कई बार बचपन में अमर उजाला पढ़ा है और यह मुझे काफी पसंद है। आपकी जो रिपोर्टिंग है वह बहुत ही निष्पक्ष है। आप रीडर्स के मन की बातें अच्छे से समझते हैं।" आलोक वाजपेयी ने कहा, "अमर उजाला को 75वीं सालगिरह पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं और आप सबकी अगले 75 साल और भी अच्छे हों इसी की हम कामना करते हैं। आप अच्छी-अच्छी खबरें छापते रहें और हम लोग पढ़ते रहें। बहुत-बहुत शुक्रिया।"
वैभव जैन, गूगल क्लाउड स्टार्टअप
View this post on Instagram
गूगल क्लाउड के स्टार्टअप बिजनेस से जुड़े वैभव जैन ने कहा, "मैं उत्तर प्रदेश राज्य के एक महत्वपूर्ण शहर मेरठ से आता हूं। दो दशक से भी ज्यादा हुए जब मैंने अपनी जन्मभूमि से पलायन किया और अपनी कर्मभूमि की ओर निकल पड़ा। इस लंबे सफर में मैं कई अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनियों में कार्यरत रहा हूं। अमर उजाला नाम से कई बचपन की यादें जुड़ीं हुईं हैं। जब भी मैं यह नाम देखता या सुनता हूं चेहरे पर एक अलग सी मुस्कुराहट आ जाती है। अमर उजाला को और उनके समस्त पाठकों को उनकी 75वीं वर्षगांठ पर मैं हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। जय हिंद जय भारत।"
विनय सिंघल, स्टेज ऐप, को-फाउंडर
स्टेज ऐप के को-फाउंडर और सीईओ विनय सिंघल ने अमर उजाला को बधाई देते हुए कहा, "मैं हरियाणा के एक छोटे से गांव नोनसर में पैदा हुआ था और वहीं बड़ा हुआ। अमर उजाला के 75 साल पूरे हुए हैं। अमर उजाला को देखते-पढ़ते हुए हम बड़े हुए हैं। उसके अंदर की इंटेरेस्टिंग चीजों को पढ़ते हुए हम बड़े हुए हैं। अमर उजाला के पाठकों को बहुत सारी बधाई। यूं ही अमर उजाला पढ़ते रहिए और अपना ज्ञान बढ़ाते रहिए।"
मोहित त्यागी, आईआईटीएन व मैथ्स गुरु
आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईटी जेई परीक्षा के लिए गणित की कोचिंग देने वाले मोहित त्यागी ने कहा, "मैंने कक्षा 12 तक की पढ़ाई एटा जिले से हिंदी माध्यम से की है। उसके बाद मैंने बीटेक की डिग्री आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में हासिल की है। विगत 20 वर्षों से मैं आईआईटी जेई की प्रवेश परीक्षा के लिए मैथेमेटिक्स पढ़ाता हूं। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है, जिसके साढ़े पांच लाख के लगभग सब्सक्राइबर हैं। यहां पर आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है।" अमर उजाला को बधाई देते हुए मोहित बोले, "हिंदी माध्यम के प्रबुद्ध समाचारपत्र अमर उजाला और उसके पाठकों को गौरवमयी 75 वर्ष पूरे होने पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मैंने अपने जीवन के बहुत सारे दिनों में सूर्य का उजाला अमर उजाला पढ़ते हुए देखा है। अपनी मातृभाषा में समाचार और विश्लेषण पढ़ने का अपना ही आनंद है। आपके गौरवमयी और सफलतम भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।"
रितेश मलिक, संस्थापक, इनोवेट को-वर्किंग स्पेस
इनोवेट को-वर्किंग के संस्थापक रितेश मलिक ने कहा, "देश में 150 से ज्यादा स्टार्टअप्स में निवेश कर चुका हूं। आज जब अमर उजाला के 75 साल पूरे हुए हैं मैं अमर उजाला की पूरी टीम को बहुत बधाई देना चाहता हूं।" रितेश ने कहा, "देश की सबसे महत्वपूर्ण रीढ़ की हड्डी उसके ज्ञान और जानकारी देने वाले सोर्स होते हैं। अमर उजाला ने पिछले 75 साल में जो ज्ञान और इन्फॉर्मेशन बांटी है उससे बहुत सारे लोगों का माइंड शेप हुआ है। आने वाले 75 साल के लिए मैं अमर उजाला की पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं और पूरे देश की तरफ से एक हम्बल वोट ऑफ ग्रेटिट्यूड देना चाहता हूं। हम सब देशवासी अमर उजाला के लिए बहुत-बहुत प्रेयर करते हैं।"
अमित लाखोटिया, पार्क प्लस, फाउंडर
अमर उजाला समाचारपत्र के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर पार्क प्लस कंपनी कंपनी के फाउंडर अमित लाखोटिया ने कहा, "भारत में चार करोड़ कारें सड़कों पर हैं। इन कार मालिकों की दैनिक समस्याओं जैसे पार्किंग, चालान, कारवॉश, डेंटिंग-पेंटिंग इत्यादि में मदद करने में पार्क प्लस उनकी मदद करता है।" अमर उजाला को बधाई देते हुए अमित लाखोटिया ने कहा, "मैं कई सालों से अमर उजाला पढ़ता आ रहा हूं। इसके 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पाठकों की तरफ से अखबार समूह को बधाई देना चाहूंगा। मैं राजस्थान के चुरू जिले के सदासर कस्बे से आता हूं। पिछले 10-15 वर्षों में अगर हम देखें तो छोटे शहरों के लोगों ने काफी बड़े-बड़े ब्रांन्ड्स बनाए हैं और मैं अमर उजाला के माध्यम से यही कहना चाहूंगा कि हिन्दुस्तान की 80-85 प्रतिशत आबादी इन्हीं शहरों, गांवों और कस्बों में बसती है। इनकी समस्याएं सॉल्व करने के लिए हमसे बेहतर लोग नहीं है। कोशिश होनी चाहिए कि हम ये प्रॉब्लम सॉल्व कर सकें।"
विजय शेखर शर्मा, संस्थापक व सीईओ पेटीएम
यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे एक छोटे से शहर से हुई शुरुआत, कई लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर डाल सकती है, उन्हें प्रेरित कर सकती है। हमेशा याद रखिए, सफलता का सिर्फ एक रास्ता नहीं होता है। सफलता पाने के लिए मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष करते हुए अपना रास्ता खुद बनाना पड़ता है। मेरी यात्रा की शुरुआत भी एक छोटे शहर से हुई थी, अमर उजाला जैसा कठिनाइयों से निकला सफलता का पथ, मुझे भी प्रेरित करता रहा है। एक बार पुन: बधाइयां।
वैभव वर्धन, सहसंस्थापक, आईएनसी 42 मीडिया
मुजफ्फरनगर से आने के बाद मैं अमर उजाला पढ़कर बड़ा हुआ हूं। मेरे पिता हिंदी के प्रोफेसर हैं, उन्होंने सुनिश्चित किया कि हम नियमित अखबार पढ़ने की आदत डालें। यह देखना प्रेरणादायक है कि छोटे शहर से शुरू हुए अखबार ने 75 वर्षों में एक स्थायी विरासत का निर्माण किया है। अमर उजाला ने मेरे जैसे छोटे शहरों के अनगिनत बच्चों को सपने पूरा करने और भारत के भविष्य को आकार देने में मदद करने के लिए प्रेरित किया है। एक बार फिर पूरी अमर उजाला टीम को शुभकामनाएं।
शेफाली जैन, सह संस्थापक, क्रिब
पढ़ लिखकर क्या कलेक्टर बनना है? बचपन में मुझे दिन रात पढ़ता देखकर पापा अक्सर ये कहा करते थे। बोर्ड्स के रिजल्ट पर अखबार में जब मेरी फोटो आई थी और पूरे शहर ने बधाई दी तब पापा गर्व से फूले नहीं समाए। एक खास रिश्ता बन गया मेरा तभी से अमर उजाला से। बिजनेस का नया दौर स्टार्टअप है। भविष्य नौजवानों का है। इस सोच से मेरे परिवार को अमर उजाला ने ही वाकिफ कराया है और मैं हमेशा इनकी बहुत आभारी रहूंगी। आप किसी भी शहर, गांव, कस्बे से आते हो, हमेशा याद रखना-सपने पिन कोड नहीं देखते।
निमित अग्रवाल, सह-संस्थापक व सीईओ डॉक्टको
मैं और अमर उजाला, अक्सर ये बातें करते हैं कि तुम न होते तो जोश सच का कहां होता। तुम न होते तो 75 साल का इतिहास जिसने लोकतंत्र को मजबूत किया है, कहां होता। सीखा है बहुत कुछ तुमसे, कैसे छोटी सी शुरुआत को इतना बड़ा किया जा सकता है।