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श्रीलंका ने कम की भारत की चिंता, हंबनटोटा पोर्ट पर पास किया संशोधित समझौता

Wed, 26 Jul 2017 08:07 AM IST
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार Updated Wed, 26 Jul 2017 08:07 AM IST
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srilanka signed Agreement on Hambantota Port
Hambantota Port

श्रीलंका के एक प्रयास से भारत की चिंता दूर होती नजर आ रही है। दरअसल, श्रीलंका ने एक संशोधित समझौता पास किया है जिसमें हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करने का प्रस्ताव है। बता दें कि चीन की मदद से श्रीलंका इस पोर्ट को विकसित करना चाहता है।

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चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स ने 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 9 हजार 7 करोड़ रुपये) में इस पोर्ट को विकसित करने का अग्रीमेंट किया। अग्रीमेंट के तहत कंपनी को पोर्ट में 80 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात हुई।  उल्लेखनीय है कि श्रीलंका में इसके तहत किए गए समझौते का पहले ही लोगों ने काफी विरोध किया था। 
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हंबनटोटा दुनिया का सबसे बिजी शिपिंग लेन है और निजीकरण होने के चलते चीनी कंपनी के हाथों में जाने से ये सुर्खियों में आया था। इस नई डील के अनुसार श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह पर वाणिज्यक परिचालन में चीन की भूमिका को सीमित करने की मांग की है।
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बता दें कि सरकार ने बंदरगाह की निगरानी करने का अधिकार खुद के पास ही रखा है। हंबनटोटा बंदरगाह पूरे एशिया में आधुनिक सिल्क रूट का अहम हिस्सा है लेकिन चीन यहां इंडस्ट्रियल जोन डिवेलप करने के नाम पर 15000 एकड़ (23 स्क्वॉयकर मील) जमीन अधिगृहित करने की फिराक में है। 

srilanka signed Agreement on Hambantota Port
Hambantota Port

इसलिए एशिया के दूसरे देशों के अलावा भारत ने इस बात पर चिंता जाहिर की है क्योंकि चीन इसका इस्तेमाल नेवी बेस बनाने के लिए कर सकता है। बता दें कि श्रीलंका में भी चीन को लेकर काफी विरोध हुआ था। लोगों को अपनी जमीन खोने का डर सता रहा था। इतना ही नहीं श्रीलंका के राजनीतिक धड़े ने भी श्रीलंका के चीन पर भरोसा करने पर आपत्ति जताई थी। 

नए समझौते के मुताबिक पोर्ट पर वाणिज्यिक परिचालन के बंटवारे के लिए दो कंपनियां बनाई जा रही हैं। सहयोगी देशों मुख्यतौर पर भारत, जापान और अमेरिका की चिंताओं का ख्याल रखते हुए व्यवस्था की गई है कि इसका इस्तेमाल मिलिटरी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नहीं किया जाएगा।

इस कंपनी की पूंजी 606 मिलियन डॉलर होगी। इसमें श्रीलंका की हिस्सेदारी 50.7 फीसदी और चीन की हिस्सेदारी 49.3 फीसदी होगी। हंबनटोटा इंटरनैशनल पोर्ट ग्रुप में चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग की 85 फीसदी हिस्सेदारी होगी। बाकी 15 फीसदी हिस्सा श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी के पास होगा।

चीनी कंपनी की पूंजी 794 मिलियन डॉलर होगी। यानी सुरक्षा संबंधित गतिविधियों का जिम्मा मुख्य तौर पर श्रीलंका के पास ही होगा। पोर्ट मिनिस्टर महिंद्रा समरसिंघे ने कहा कई विदेशी सरकारों ने हमसे सफाई मांगी थी कि क्या चीन की नेवी इस पोर्ट का इस्तेमाल हिंद महासागर में अपनी गतिविधियों के लिए भी करेगी। 

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